राइटर्स बिल्डिंग : 13 साल बाद फिर लौटेगी पश्चिम बंगाल की सत्ता के ऐतिहासिक केंद्र की रौनक

कोलकाता, 09 मई । मध्य कोलकाता के डलहौजी इलाके में स्थित ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग को भला कौन नहीं जानता। वर्ष 1947 से 2013 तक यह पश्चिम बंगाल के शासन तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहा। लेकिन वर्ष 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के दो साल बाद यहां की प्रशासनिक गतिविधियां धीरे-धीरे समाप्त हो गईं और राज्य सचिवालय को नवान्न स्थानांतरित कर दिया गया। अब एक बार फिर राइटर्स बिल्डिंग के पुराने दिन लौटने वाले हैं, क्योंकि नई भाजपा सरकार ने फैसला किया है कि सरकार का कामकाज फिर से यहीं से संचालित होगा।
राइटर्स बिल्डिंग का निर्माण 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ था। वर्ष 1777 में अंग्रेज वास्तुकार थॉमस लायन ने इसकी डिजाइन तैयार की थी। इसका दक्षिणी हिस्सा लालदिघी के उत्तरी छोर के समानांतर बनाया गया था। लालदिघी और राइटर्स बिल्डिंग के बीच एक सड़क गुजरती है, जो आगे लालबाजार की ओर जाती है।
शुरुआत में इस भवन का उपयोग अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक कार्यालय के रूप में किया। समय के साथ जैसे-जैसे प्रशासनिक जरूरतें बढ़ती गईं, भवन में कई बदलाव और विस्तार किए गए। बाद में जब कोलकाता देश की राजधानी बना, तब राइटर्स बिल्डिंग की अहमियत और बढ़ गई। राजधानी दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद भी कोलकाता अंग्रेजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना रहा और राइटर्स बिल्डिंग प्रशासन का प्रमुख केंद्र बनी रही।
आजादी के बाद यह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और राज्य सचिवालय का मुख्य कार्यालय बन गया। यहां मुख्यमंत्री का दफ्तर होने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के कार्यालय भी संचालित होते थे।
बताया जाता है कि 18वीं शताब्दी के अंतिम दौर में अंग्रेजों का प्रशासनिक कामकाज काफी बढ़ गया था। लिखने-पढ़ने, रिकॉर्ड रखने, बैठकों और प्रशासनिक निर्णयों के लिए बड़े कार्यालयों की आवश्यकता महसूस हुई। चूंकि यहां बड़ी संख्या में “राइटर्स” यानी लेखा-जोखा और दस्तावेज तैयार करने वाले कर्मचारी बैठते थे, इसलिए इस भवन का नाम “राइटर्स बिल्डिंग” पड़ गया।
राइटर्स बिल्डिंग का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 5.5 लाख वर्गफुट बताया जाता है। नवान्न में सचिवालय स्थानांतरित होने से पहले यहां मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा राज्य सरकार के 34 विभाग संचालित होते थे। इन विभागों में काम करने वाले करीब 6 हजार से अधिक कर्मचारी यहीं बैठकर सरकारी कामकाज और फाइलों का निपटारा करते थे।

 

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