आत्मा की भावुक अभिव्यक्ति है कविता: डॉ. ऋषिकेश राय

 

कोलकाता, 13 अप्रैल: कोलकाता की प्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था भारतीय भाषा परिषद द्वारा आयोजित ‘काव्य लहरी: सीजन-3’ की दूसरी लहर ने शहर के काव्य-रसिकों को भाव-विभोर कर दिया। पिछले दो सीजनों की अपार सफलता के बाद, इस तीसरे सीजन में भी कार्यक्रम की लोकप्रियता का ग्राफ और ऊँचा होता नजर आया। सभागार में दर्शकों की इतनी भारी भीड़ उमड़ी कि कुर्सियाँ कम पड़ गईं और बड़ी संख्या में लोग खड़े होकर कविताओं का आनंद लेते रहे; हालांकि बाद में परिषद द्वारा उनके बैठने की अतिरिक्त व्यवस्था भी की गई।
लोकसभा एवं श्रद्धांजलि :
“समाजसेवा के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले श्री सरदारमल कांकरिया जी के असामयिक निधन पर कार्यक्रम की शुरुआत में गहरा दुख व्यक्त किया गया। उनकी पुण्य स्मृति में दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें सादर श्रद्धांजलि दी गई।”

गंभीर विमर्श और अध्यक्षीय वक्तव्य:
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में टी-बोर्ड (भारत सरकार) के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. ऋषिकेश राय उपस्थित थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “कविता हमें मनुष्यता सिखाती है और यह संप्रेषण का सबसे सशक्त माध्यम है।” उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि जहाँ पाश्चात्य देशों में कविता संकट में है, वहीं भारत में यह आज भी जीवित और फल-फूल रही है। उन्होंने कवियों को सलाह दी कि बदलते समय के साथ कविता में नए विषयों को समाहित करना अत्यंत आवश्यक है।
काव्य-पाठ और साहित्यिक रंग
लोकप्रिय कवि डॉ. गिरिधर राय के कुशल संयोजन और चिर-परिचित संचालन शैली ने दर्शकों का मन मोह लिया। उन्होंने अपनी हास्य रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और कार्यक्रम के गौरवशाली इतिहास व भविष्य की योजनाओं से सभी को परिचित कराया। मंच पर आमंत्रित कवियों में विजय शर्मा ‘विद्रोही’, ओमप्रकाश मिश्र, शिपाली गुप्ता और वीणा रजक ने अपनी विशिष्ट रचनाओं से समां बाँध दिया।
विशेष योगदान एवं प्रबंधन
इस भव्य कार्यक्रम के सफल आयोजन और सुव्यवस्थित प्रबंधन में भारतीय भाषा परिषद की अध्यक्ष डॉ. कुसुम खेमानी, निदेशक डॉ. शंभुनाथ, वित्त सचिव श्री घनश्याम सुगला और कार्यकारिणी सदस्य श्री आशीष झुनझुनवाला का विशेष योगदान रहा। परिषद के इन पदाधिकारियों की सक्रियता ने कार्यक्रम की गरिमा में चार चाँद लगा दिए।


विशिष्ट उपस्थिति
कार्यक्रम में कोल इंडिया के सीईओ श्री बी.के. त्रिपाठी के गरिमामय सान्निध्य और अंतर्राष्ट्रीय गजलकार सुशील ठाकुर ‘साहिल’ की उपस्थिति विशेष रही। इनके साथ ही अरुण मल्लावत, रामाकांत सिन्हा, अशोक शर्मा, वी.के. पांडे, विनय कुमार शर्मा, विनोदानंद, दामोदर सुटोडिया, हिमाद्री मिश्रा, उषा जैन, डॉ. रंजना त्रिपाठी, शिव कुमार जायसवाल, लक्ष्मी जायसवाल, प्रणति ठाकुर, अश्विनी कुमार झा, रंजना झा, मनोज मिश्र,चंद्रिका प्रसाद अनुरागी, शिव शंकर सिंह सुमित, नागेंद्र कुमार दुबे, भारती मिश्रा, मौसमी प्रसाद, ओम प्रकाश चौबे, कंचन शर्मा, अरूणिका विजय, आध्याश्री और प्रीति धानुक जैसे अनेकानेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
समापन
अंत में परिषद की ओर से श्रीमती विमला पोद्दार ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम की शानदार सफलता के लिए सभी रचनाकारों, प्रबंधकों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

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