
बड़ाबाजार लाइब्रेरी में गूँजा ‘वन्दे मातरम्’, काव्य गोष्ठी में उमड़ा जनसैलाब
काव्य रश्मियों से महकी राष्ट्रभक्ति की शाम: 150 वर्ष का हुआ ‘वन्दे मातरम्’
कोलकाता, 6 अप्रैल 2026 . बड़ाबाजार लाइब्रेरी के तत्वावधान में राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के 150 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शनिवार को एक भव्य ‘अंतरंग काव्य गोष्ठी’ का आयोजन किया गया। राष्ट्रभक्ति और साहित्य के अनूठे संगम ने इस संध्या को ऐतिहासिक बना दिया।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
पुण्य स्मरण और श्रद्धांजलि: आज की तिथि साहित्यिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम के दौरान प्रख्यात कवि माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती तथा सुप्रसिद्ध साहित्यकार अज्ञेय एवं वीरांगना झलकारी बाई की पुण्यतिथि पर उन्हें भावपूर्ण भावांजलि अर्पित की गई।
वन्दे मातरम् का सामूहिक गान: कार्यक्रम की सबसे गौरवमयी प्रस्तुति लाइब्रेरी के अध्यक्ष श्री जय गोपाल गुप्ता द्वारा ‘वन्दे मातरम्’ का गायन रहा। उनके स्वर में स्वर मिलाते हुए पूरा सदन सम्मान में खड़ा हो गया, जिससे वातावरण पूर्णतः राष्ट्रभक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
मंच की गरिमा और अतिथि:
समारोह की अध्यक्षता कोल इंडिया के सीवीओ श्री बी. के. त्रिपाठी ने की। मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ मेडिकल कॉर्पोरेशन के चेयरमैन (राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) श्री दीपक महासकेय उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में राजस्थान परिषद के अध्यक्ष श्री मोहनलाल पारीक एवं जालान पुस्तकालय की मंत्री श्रीमती दुर्गा व्यास ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
अतिथियों के उद्बोधन:
मुख्य अतिथि श्री दीपक महासकेय ने अपने संबोधन में कहा, “आज के मोबाइल युग में यहाँ उपस्थित श्रोताओं का बिना विचलित हुए एकाग्र होकर बैठना इस लाइब्रेरी की महत्ता को दर्शाता है। साहित्य रसिकों की यह तन्मयता बंग भूमि की समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रमाण है।”

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री बी. के. त्रिपाठी ने कहा, “‘वन्दे मातरम्’ शब्द में अद्भुत शक्ति है। यह मंत्र राष्ट्र के गौरव का प्रतीक है।” उन्होंने बंगाल की उस पावन धरा को नमन किया जहाँ बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसी विभूतियों ने अपनी लेखनी से संपूर्ण भारत को आलोकित किया। साथ ही, उन्होंने स्व. पं. लक्ष्मण त्रिपाठी ‘प्रवासी’ रचित ‘वन्दे मातरम्’ का भोजपुरी गीत सुनाकर सभी को भाव-विभोर कर दिया।
विशिष्ट अतिथि श्री मोहनलाल पारीक ने कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु कार्यकर्ताओं एवं कवियों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। श्रीमती दुर्गा व्यास ने प्रेम शंकर त्रिपाठी की ‘वन्दे मातरम्’ रचना का सुमधुर पाठ किया।
स्वागत एवं कुशल संचालन:
कार्यक्रम का औपचारिक स्वागत बड़ाबाजार लाइब्रेरी के मंत्री श्री अशोक कुमार गुप्ता ने किया। कार्यक्रम की सफलता का मुख्य श्रेय डॉ. गिरिधर राय के ओजस्वी संचालन को जाता है। उन्होंने अपनी सधी हुई वाणी और चिरपरिचित अंदाज़ से श्रोताओं को आदि से अंत तक बांधे रखा। उनकी वाक्पटुता ने इस काव्य गोष्ठी की गरिमा को द्विगुणित कर दिया।
इस भव्य कार्यक्रम को साकार करने में अरुण मल्लावत, संतोष सराफ, सुनील मोर, रामाकांत सिन्हा, विष्णु वर्मा और प्रतीप सिकारिया का विशेष योगदान रहा।
काव्य प्रस्तुति एवं सहभागिता:
दर्शकों से खचाखच भरे ‘आचार्य विष्णुकान्त शास्त्री सभागार’ में अनेक रचनाकारों ने अपनी काव्य-प्रस्तुतियों से श्रद्धासुमन अर्पित किए। काव्य पाठ करने वालों में मुख्य रूप से हीरालाल जायसवाल, अनिता राय, नगेन्द्र दूबे, राज किशन शर्मा, गणेश नाथ तिवारी, चंद्रिका प्रसाद अनुरागी, सुरेश चौधरी, नंदू बिहारी, डॉ. मनोज मिश्र, रणजीत भारती, हिमाद्री मिश्रा, डॉ. राजन शर्मा, विजय शर्मा ‘विद्रोही’, कमल पुरोहित ‘अपरिचित’, चित्रा राय ‘श्रीकृष्णवी’, रामाकांत सिन्हा, आलोक चौधरी, बीना रजक, डॉ. सुभाष चंद्र शुक्ला, शशि लाहोटी, सीमा शर्मा, रीता चंद्रा पात्रा, प्रदीप कुमार धानुक, हीरालाल साव और मानस कुमार आदि सम्मिलित थे।
श्रोताओं के रूप में डॉ. रवि शंकर मिश्रा, दामोदर सुटोडिया, विनय कुमार शर्मा, कैप्टन जितेंद्र कौशिक, जितेंद्र जायसवाल, शशिकांत डालमिया, रजनी आनंद (रांची), बबलू भगत (झारखंड), वेद प्रकाश गुप्ता, विष्णु वर्मा, भंवरलाल गट्टानी, कुसुम लुण्डिया, भागीरथ सारस्वत, कृष्णानंद मिश्र, कुंदन कुमार, श्रीमोहन तिवारी, गौतम नंदी, विश्वजीत शर्मा, संजय शुक्ला, जतिन हयाल, मोहन चतुर्वेदी, नारायण प्रसाद अग्रवाल, नागेंद्र राय, आयुष राय और नैतिक यादव आदि अंत तक उपस्थित रहकर तालियों की गड़गड़ाहट से कवियों का उत्साहवर्धन करते रहे।
अत में, श्री सी. के. जैन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।
