
कोलकाता, 02 अप्रैल । पश्चिम बंगाल के कई जिलों में गुरुवार को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के आरोप को लेकर व्यापक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया। मालदा से शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, मुर्शिदाबाद और पूर्व बर्दवान तक फैल गया, जिससे कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर यातायात बाधित हो गया।
मालदा जिले के ओल्ड मालदा ब्लॉक के मंगलबाड़ी इलाके में सुबह से ही प्रदर्शन शुरू हो गया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाकर तथा बांस की बैरिकेडिंग कर राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को जाम कर दिया। अवरोध करीब चार घंटे तक चला। बाद में अतिरिक्त जिलाधिकारी शेख अंसार अहमद मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को आश्वासन देने के बाद जाम समाप्त कराया गया।
इसके बाद यह विरोध जलपाईगुड़ी जिले के मयनागुड़ी तक फैल गया, जहां हुसुलडांगा इलाके में स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-27 को जाम कर दिया। इसके चलते मालवाहक वाहनों की लंबी कतार लग गई। थाना प्रभारी सुबल चंद्र घोष ने बताया कि सुबह से जाम जारी था और काफी देर तक प्रदर्शनकारियों को हटाया नहीं जा सका। लंबे समय तक बाधित रहने के बाद राजमार्ग को खोला गया।
कूचबिहार जिले के माथाभांगा क्षेत्र के पचागढ़ ग्राम पंचायत के मदरसा मोड़ पर भी स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। यहां भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कूचबिहार-माथाभांगा राज्य मार्ग को करीब तीन घंटे तक अवरुद्ध रखा और सड़क पर टायर जलाकर विरोध जताया।
मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का क्षेत्र के बेवा-1 और नयनसुख इलाकों में भी इसी मुद्दे को लेकर प्रदर्शन देखने को मिला, जहां स्थानीय लोगों ने अपने नाम मतदाता सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया।
मालदा के इंग्लिश बाजार के यदुपुर इलाके में एक अन्य घटना में कुछ लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को जाम करने की कोशिश की। पुलिस के हस्तक्षेप करने पर प्रदर्शनकारियों के साथ बहस हो गई और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आरोप है कि इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आक्रामक रुख अपनाया, जिसमें एक पुलिस वाहन चालक के सिर में चोट लग गई।
पूर्व बर्दवान जिले के शक्तिगढ़ में भी इस मुद्दे को लेकर आक्रोश देखा गया। यहां एक मौन जुलूस निकाला गया, जिसमें शामिल लोगों ने आरोप लगाया कि कई वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। इसके बाद प्रदर्शनकारी बर्दवान-दो ब्लॉक के बीडीओ कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया के बाद कई लोगों के नाम “विचाराधीन” और “हटाए गए” श्रेणी में डाल दिए गए हैं। चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर बढ़ता असंतोष प्रशासन और चुनाव आयोग के लिए एक नई चुनौती बनता नजर आ रहा है।
