
कोलकाता, 28 फरवरी । विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची को लेकर पश्चिम बंगाल में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सूची जारी होते ही श्यामपुकुर की विधायक और राज्य की मंत्री शशि पांजा ने हटाए गए नामों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नए मतदाताओं का स्वागत है, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम अनुचित रूप से सूची से बाहर न हुआ हो।
उन्होंने कहा कि जो नए नाम जुड़े हैं, उनका स्वागत है। लेकिन जिनके नाम हटाए गए हैं, उनकी जांच जरूरी है। यदि किसी वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया है तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसा होने पर लोग चुनाव आयोग पर से विश्वास खो देंगे।
तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों का दावा है कि प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब एक करोड़ 20 लाख नाम सूची से बाहर हुए हैं। उत्तर कोलकाता क्षेत्र में ही चार लाख से अधिक नाम हटाए जाने की बात कही जा रही है। इसी बड़े पैमाने पर विलोपन को लेकर शशि पांजा ने चिंता जताई है।
शशि पांजा का आरोप है कि वर्ष 2002 की मतदाता सूची में जिन परिवारों के नाम दर्ज थे, उन्हें सुनवाई के लिए न बुलाने का निर्देश होने के बावजूद इस नियम का पालन नहीं किया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि अन्य राज्यों में एक नियम और पश्चिम बंगाल में अलग व्यवस्था क्यों अपनाई गई। उनके अनुसार पुनरीक्षण के दौरान “भाई-बहनों की संख्या अधिक होने” जैसे आधार पर लोगों को दूर-दराज के सुनवाई केंद्रों पर बुलाकर अनावश्यक परेशान किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन नामों को हटाया गया है, उसके आधार की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी प्रक्रिया के विरोध में नहीं है, बल्कि समयसीमा और कार्यपद्धति को लेकर आपत्ति थी। उनके शब्दों में, “इतने महत्वपूर्ण कार्य को कम समय में पूरा करने की जल्दबाजी से जटिलताएं पैदा हुईं। नागरिक स्वाभाविक रूप से मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना चाहते हैं, लेकिन ऐसा लगा मानो आयोग यह तय कर रहा हो कि किसे मताधिकार मिलेगा और किसे नहीं।”
