चुनाव आयोग ने बंगाल सरकार से 9 फरवरी तक मांगी समयबद्ध अनुपालन रिपोर्ट

कोलकाता, 05 फरवरी । केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार पर चुनावी प्रशासन से जुड़े अपने कई निर्देशों का पालन न करने का आरोप लगाया। आयोग ने राज्य सरकार से सभी लंबित मामलों में 9 फरवरी दोपहर 3 बजे तक समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में चुनाव आयोग ने कहा कि इससे पहले जारी किए गए कई निर्देशों का बार-बार याद दिलाने के बावजूद पालन नहीं किया गया। आयोग ने बताया कि दो निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी, दो सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और एक डेटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ अब तक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।
चुनाव आयोग ने इस संबंध में 5 अगस्त, 2025 और 2 जनवरी, 2026 को भेजे गए अपने पूर्व पत्रों का भी हवाला दिया। आयोग ने बशीरहाट-द्वितीय के सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी एवं खंड विकास अधिकारी सुमित्रा प्रतिम प्रधान को निलंबित न किए जाने पर भी आपत्ति जताई। आरोप है कि उन्होंने वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए स्वयं आदेश जारी कर 11 अतिरिक्त सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों की तैनाती कर दी।
आयोग ने कहा कि 25 जनवरी, 2026 को भेजे गए पत्र के माध्यम से 48 घंटे के भीतर अनुपालन मांगा गया था। इस मामले को 21 सितंबर, 2000 के उच्चतम न्यायालय
के आदेश और 31 मई, 2023 को जारी चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन बताया गया है।
इसके अलावा, आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)
से जुड़े अपने निर्देशों के उल्लंघन में स्थानांतरित किए गए तीन निर्वाचन सूची पर्यवेक्षकों, अश्विनी कुमार यादव, रणधीर कुमार और स्मिता पांडे के तबादले रद्द न किए जाने पर भी नाराजगी जताई। इस संबंध में 27 जनवरी, 2026 को पत्र भेजकर 28 जनवरी दोपहर 3 बजे तक अनुपालन मांगा गया था।
चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों की नियुक्ति निर्धारित मानदंडों के अनुरूप नहीं की गई। आयोग के अनुसार, उसके 16 जून, 2023 और 26 जून, 2023 के निर्देशों के तहत उपखंड अधिकारी या उपजिलाधिकारी स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति अनिवार्य है, जबकि 19 जनवरी, 2026 के उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का भी उल्लंघन हुआ है।
आयोग ने अक्टूबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच भेजे गए कई पत्रों का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार से सभी लंबित मुद्दों पर 9 फरवरी दोपहर 3 बजे तक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट जमा करने को कहा है।

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