
कोलकाता, 30 जनवरी । कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग और भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को निर्देश दिया कि वे चुनाव संबंधी कार्यों में तैनात एलआईसी के फील्ड कर्मियों की सेवा शर्तों की सुरक्षा से जुड़ी याचिका पर हलफनामा दाखिल करें।
यह याचिका नेशनल फेडरेशन ऑफ इंश्योरेंस फील्ड वर्कर्स ऑफ इंडिया द्वारा दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे एलआईसी के कर्मचारी हैं और निर्वाचन आयोग के निर्देश पर समय-समय पर उन्हें चुनावी कार्यों में लगाया जाता है। संगठन ने आशंका जताई है कि चुनाव ड्यूटी के कारण वे अपने निर्धारित बीमा व्यवसाय लक्ष्य पूरे नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी सेवा शर्तें और पदस्थापन प्रभावित हो सकती हैं।
न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस विवाद के निपटारे के लिए एलआईसी और निर्वाचन आयोग दोनों का पक्ष जानना आवश्यक है। अदालत ने सवाल किया कि जब कर्मचारियों को संवैधानिक संस्था के कार्य के लिए भेजा जा रहा है, तो इससे उनकी सेवा शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव क्यों पड़े।
अदालत ने एलआईसी और निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वे दो सप्ताह के भीतर इस मामले में अपनी-अपनी रिपोर्ट हलफनामे के रूप में दाखिल करें। इसके बाद याचिकाकर्ता को इन रिपोर्टों पर एक सप्ताह के भीतर आपत्ति दाखिल करने की छूट दी गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 26 फरवरी तय की है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य चल रहा है और आगामी महीनों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में एलआईसी के फील्ड कर्मियों को लगातार चुनाव ड्यूटी में लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक ओर कर्मचारियों पर निर्वाचन आयोग की ड्यूटी निभाने का दायित्व है, वहीं दूसरी ओर एलआईसी की सेवा शर्तों के अनुसार लक्ष्य पूरे न होने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।
भट्टाचार्य ने दलील दी कि चुनाव ड्यूटी के कारण कर्मचारी पिछले तीन महीनों से अपने बीमा व्यवसाय से जुड़े कार्यों से दूर रहे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि यह निर्देश दिया जाए कि निर्वाचन आयोग के लिए कर्तव्य निर्वहन करने की अवधि को एलआईसी के व्यवसायिक लक्ष्य पूरे न होने के आधार के रूप में गणना न किया जाए।
वहीं, निर्वाचन आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि कुछ कर्मचारियों को चयनित दिनों के लिए ही चुनावी कार्यों में लगाया गया है। दूसरी ओर, एलआईसी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि निगम के एक हजार 210 कर्मचारियों को निर्वाचन आयोग ने चुनावी कार्यों के लिए अधिग्रहित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि एक ओर एलआईसी को अपने कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए भेजना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे निगम के व्यवसाय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद हलफनामे दाखिल करने का निर्देश देते हुए मामले की आगे की सुनवाई तय कर दी है।
