कोलकाता, 30 जनवरी । आगामी महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल में मतदान केंद्रों की आधारभूत सुविधाओं को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने शुक्रवार को भारत निर्वाचन आयोग से राज्य के मतदान केंद्रों की अवसंरचना स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने यह निर्देश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में राज्य के कई मतदान केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं की खराब स्थिति का आरोप लगाया गया है। यह जनहित याचिका भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य समिक भट्टाचार्य द्वारा दायर की गई है।
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग का पक्ष सुने बिना इस मामले में कोई विस्तृत आदेश पारित नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने आयोग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि मतदान केंद्रों की अवसंरचना की समीक्षा और निगरानी की प्राथमिक जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है, और आयोग इस विषय में राज्य सरकार को आवश्यक निर्देश देने के लिए अधिकृत है। इसलिए आयोग से यह बताने को कहा गया है कि राज्य के मतदान केंद्रों में अवसंरचना के रखरखाव और सुधार के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है।
उल्लेखनीय है कि निर्वाचन आयोग ने देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मतदान केंद्रों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देश तय कर रखे हैं। इसके बावजूद पश्चिम बंगाल में, विशेषकर दूरदराज़ ग्रामीण इलाकों में, लंबे समय से मतदाताओं द्वारा यह शिकायत की जाती रही है कि कई मतदान केंद्रों पर ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) इस बार मतदान केंद्रों पर आश्वस्त न्यूनतम सुविधाओं (एएमएफ) और विस्तारित न्यूनतम सुविधाओं (ईएमएफ) के रखरखाव के लिए राज्य की सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई मैकिंटोश बर्न लिमिटेड (एमबीएल) को कार्यान्वयन एजेंसी बनाना चाहते थे। प्रारंभ में एमबीएल प्रबंधन ने इसके लिए सहमति भी जताई थी, लेकिन बाद में उन्होंने इस जिम्मेदारी को निभाने में असमर्थता जताते हुए सीईओ कार्यालय को इसकी जानकारी दे दी।
इस मामले पर अब सभी की निगाहें निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट और अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
