लक्खी भंडार योजना रोकने पर हाई कोर्ट सख्त, बंगाल सरकार से मांगा जवाब

कोलकाता, 29 जनवरी । कलकत्ता हाई कोर्ट ने पूर्व मेदिनीपुर जिले की एक ग्राम पंचायत में महिलाओं के लिए चलाई जा रही राज्य सरकार की लक्खी भंडार योजना के तहत वित्तीय सहायता रोके जाने के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने गुरुवार को यह आदेश एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पूर्व मेदिनीपुर जिले की मोयना विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली बागचा ग्राम पंचायत में करीब सात हजार महिलाओं को लक्खी भंडार योजना का लाभ सितंबर 2025 से नहीं मिल रहा है।

गौरतलब है कि बागचा ग्राम पंचायत भारतीय जनता पार्टी के नियंत्रण में है और इस क्षेत्र से विधायक भाजपा नेता और पूर्व भारतीय क्रिकेटर अशोक डिंडा हैं। यह जिला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी का भी गृह जिला है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने अदालत में दलील दी कि पंचायत भाजपा शासित होने के कारण जानबूझकर महिलाओं की वित्तीय सहायता रोकी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के अनुसार लक्खी भंडार योजना की राशि जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा की जानी चाहिए, इसके बावजूद भुगतान बंद कर दिया गया।

लक्खी भंडार राज्य सरकार की एक प्रमुख महिला कल्याण योजना है, जिसके तहत अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं को एक हजार 200 रुपये प्रति माह, जबकि अन्य महिलाओं को हजार रुपये प्रति माह की सहायता दी जाती है।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि योजनाओं के लाभ वितरण को लेकर कुछ शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनकी जांच की जा रही है, इसी कारण भुगतान रोका गया है।

हालांकि, दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता के तर्कों को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से इस मामले में स्पष्टीकरण और रिपोर्ट तलब की है।

अब इस मामले की अगली सुनवाई सरकार द्वारा रिपोर्ट दाखिल किए जाने के बाद होगी।

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