
कोलकाता, 23 जनवरी । कोलकाता के रेड रोड पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नाम लिए बिना केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने अपने उपनाम को लेकर उठे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह बंगाली में अपना उपनाम ‘बंद्योपाध्याय’ और अंग्रेज़ी में ‘बनर्जी’ लिखती हैं, इसमें कोई समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस छोटे से अंतर को न समझने वालों की निंदा करने के अलावा उनके पास और कुछ करने को नहीं है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आदिवासियों और अनुसूचित जाति-जनजाति के लोगों के नाम सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि लोगों से उनके माता-पिता के जन्म प्रमाणपत्र क्यों मांगे जा रहे हैं। इस संदर्भ में ममता बनर्जी ने कहा कि उनके घर में काम करने वाली एक आदिवासी लड़की ने बताया कि उसके परिवार के सभी सदस्यों को बुलाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को भी माता-पिता की उम्र के अंतर को लेकर तलब किया गया था।
अपने भाषण में ममता बनर्जी ने कटाक्ष करते हुए कहा कि अब क्या यह भी पूछा जाएगा कि कोई शादी करेगा या नहीं, प्रेम करेगा या नहीं, या बच्चे पैदा करेगा या नहीं। उन्होंने व्यंग्य के लहजे में कहा कि क्या अब बच्चों के जन्म के लिए भी अनुमति लेनी होगी।
मुख्यमंत्री ने एक बार फिर विशेष गहन एसआईआर प्रक्रिया का विरोध दोहराया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पहले ही इस प्रक्रिया के खिलाफ चुनाव आयोग तक अपनी आपत्ति दर्ज करा चुकी है। नेताजी जयंती के मंच से भी उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह राजनीति की बात नहीं कर रहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन और अधिकारों की बात कर रही हैं।
ममता बनर्जी ने अपने भाषण में कहा कि एक इंसान की ज़िंदगी की कीमत बहुत ज्यादा होती है। आज हमें कौरव पक्ष से लड़ना पड़ रहा है, लोगों को दानवों से लड़ना पड़ रहा है। आज आप सत्ता में हैं, लेकिन कल जब सत्ता में नहीं रहेंगे, तब आपको भागना पड़ेगा।
