
कोलकाता, 20 जनवरी । पश्चिम बंगाल सरकार ने जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) प्रशांत बर्मन को उनके पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय द्वारा स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या के अपहरण और हत्या मामले में बर्मन को आत्मसमर्पण का निर्देश दिए जाने के 24 घंटे के भीतर की गई।
राज्य सरकार ने मंगलवार को सौरव कांति मंडल को नया राजगंज बीडीओ नियुक्त किया। इससे पहले वह राजगंज के संयुक्त बीडीओ के रूप में कार्यरत थे। नए बीडीओ के पदभार संभालने पर तृणमूल कांग्रेस विधायक खगेश्वर राय ने उन्हें सम्मानित किया और उम्मीद जताई कि अब प्रखंड में विकास कार्यों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक कामकाज में जो रुकावटें थीं, वे अब दूर होंगी और आम लोगों को लाभ मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि, 29 अक्टूबर को कोलकाता के साल्टलेक स्थित दत्ताबाद इलाके से अपहृत स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या का शव न्यू टाउन के जात्रागाछी क्षेत्र से बरामद हुआ था। पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इस मामले में प्रशांत बर्मन का नाम भी सामने आया है और बिधाननगर पुलिस ने उन्हें इस घटना का “मुख्य आरोपित” बताया है।
आरोप सामने आने के बाद से ही प्रशांत बर्मन फरार चल रहे थे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया था कि नाम जुड़ने के बावजूद राज्य सरकार ने उनके खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं की। हालांकि, उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद उन्हें तत्काल पद से हटा दिया गया।
गिरफ्तारी से बचने के लिए बर्मन ने विभिन्न अदालतों का रुख किया। पहले उन्होंने उत्तर 24 परगना जिले की बारासात अदालत से अग्रिम जमानत प्राप्त की, जिसे बाद में बिधाननगर पुलिस की याचिका पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया। न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने अग्रिम जमानत खारिज करते हुए 72 घंटे के भीतर निचली अदालत में आत्मसमर्पण का निर्देश दिया था, लेकिन बर्मन ने ऐसा नहीं किया। इसके बाद बिधाननगर अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
बर्मन ने उच्च न्यायालय के आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी, लेकिन वहां से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। उच्चतम न्यायालय की पीठ न्यायमूर्ति राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने आदेश दिया कि उन्हें शुक्रवार तक निचली अदालत में आत्मसमर्पण करना होगा।
हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आत्मसमर्पण के बाद वह जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं और पुलिस को जांच के लिए हिरासत की मांग करने का अधिकार होगा।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद ही राज्य सरकार ने प्रशांत बर्मन को राजगंज बीडीओ के पद से हटा दिया।
