
कांग्रेस का आजादी में कोई योगदान नहीं : गोपाल शर्मा
– वाणी साहित्य घर में पुस्तक”भारत की संतान : स्वतंत्रता संग्राम में स्वयंसेवक” पर हुई परिचर्चा
– विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार, विश्लेषक डॉ अवनिजेश अवस्थी, पूर्व सांसद तरुण विजय भी रहे मौजूद
नई दिल्ली(आकाश शर्मा)। प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेला 2026 में शुक्रवार को वरिष्ठ पत्रकार एवं सिविल लाइंस, जयपुर के भाजपा विधायक गोपाल शर्मा की वाणी प्रकाशन द्वारा हाल ही में प्रकाशित पुस्तक “भारत की संतान : स्वतंत्रता संग्राम में स्वयंसेवक” पर गहन परिचर्चा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के योगदान को रेखांकित किया गया। उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक की भूमिका पद्म विभूषित डॉ मुरली मनोहर जोशी द्वारा लिखी गई है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने गोपाल शर्मा को पुस्तक लेखन के लिए बधाई देते हुए आजादी के आंदोलन में संघ के महत्वपूर्ण योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने स्वाधीनता की लड़ाई लड़ी और उसके बाद स्वतंत्र, लोकतंत्रात्मक राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने कभी अपने किए राष्ट्र हित के कार्यों का श्रेय लेने की कोशिश नहीं की। लेकिन पत्रकार विधायक गोपाल शर्मा ने पुस्तक में इसकी प्रमाणिक एवं शोध परक जानकारी उपलब्ध करवाई है। शर्मा विषय की गहराई में जाकर पुस्तकें लिखने के अभ्यस्त रहे हैं। आलोक कुमार ने कहा कि संघ ने स्वतंत्रता आंदोलन में संगठन के तौर पर स्वयंसेवकों को पूरी छूट दी हुई थी। संघ के इस प्रयास से महात्मा गांधी और सुभाष चंद्र बोस भी अत्यधिक प्रभावित थे।

कांग्रेस का आजादी में कोई योगदान नहीं : गोपाल शर्मा
पुस्तक के लेखक गोपाल शर्मा ने परिचर्चा में कहा कि आजादी की लड़ाई किसी पार्टी या संगठन ने नहीं, बल्कि जनता ने खुद लड़ी। कांग्रेस का आजादी में कोई योगदान नहीं रहा। कांग्रेस की स्थापना आजादी का आंदोलन चलाने के लिए नहीं हुई थी और न ही उसने कोई भूमिका निभाई। आजादी की लड़ाई किसी पार्टी या संगठन ने नहीं, बल्कि जनता ने स्वयं लड़ी। आंदोलन में कांग्रेस से किसी ने भी शहादत नहीं दी। महात्मा गांधी ने कांग्रेस को सुधारने का प्रयास किया, लेकिन अंततः खुद छोड़ दी। सुभाष चंद्र बोस और डॉ. हेडगेवार ने भी कांग्रेस त्याग दी। सुभाषचंद्र बोस ने कांग्रेस से अलग होने के बाद क्रांतिकारियों को संगठित करने के लिए डॉ. हेडगेवार से संपर्क किया था। विधायक शर्मा ने सावरकर की माफी पर सवाल उठाने वालों से नेहरू द्वारा नाभा जेल से माफी मांगने का जिक्र कर पूछा कि यह दोहरा मापदंड क्यों? उन्होंने कहा कि वीर सावरकर की माफी पर सवाल उठाने वाले कांग्रेसी ये क्यों भूल जाते हैं कि नेहरू खुद नाभा जेल से माफी मांगकर छूटे थे!

वामपंथ की विषबेल घातक : तरूण विजय
पाञ्चजन्य के पूर्व संपादक एवं पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय ने गोपाल शर्मा की पत्रकारिता और लेखनी की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने शर्मा की धारदार खबरों का उल्लेख करते हुए सोमनाथ और अयोध्या को भारतीय सांस्कृतिक गौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक बताया। विजय ने कहा कि वामपंथ की विषबेल ने देश की पीढ़ियों को समृद्ध इतिहास से दूर रखने का कुत्सित प्रयास किया। गोपाल शर्मा की यह पुस्तक सत्य को उजागर करती है, जिस पर अब सवाल उठाए जाएंगे और वाणी प्रकाशन को भी कठघरे में खड़ा किया जाएगा। उन्होंने जिक्र किया कि महात्मा गांधी कांग्रेस के सामने नई पार्टी खड़ी करने में जुटे थे और नेहरू इसके सख्त खिलाफ थे, उनकी जिद के आगे स्वयं गांधी भी असहज थे।
संघ के योगदान को छिपाने का षड्यंत्र : अवस्थी
विशिष्ट अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक एवं वरिष्ठ विश्लेषक डॉ. अवनिजेश अवस्थी ने तत्कालीन सरकारों द्वारा स्वतंत्रता आंदोलन में संघ के योगदान को इतिहास के पन्नों से छिपाने की कटु आलोचना की। उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर संघ की भूमिका को उजागर किया। विभाजन प्रस्ताव स्वीकार कर कांग्रेस पूरी तरह राजनीतिक दल बन गई, जिसे भंग करने के लिए महात्मा गांधी आवाज भी उठाई।
वहीं, कार्यक्रम के अंत में वाणी प्रकाशन के चेयरमैन अरूण माहेश्वरी ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थितजन का आभार जताया। अनेक ऐतिहासिक तथ्यों से परिपूर्ण पुस्तक “भारत की संतान – स्वतंत्रता संग्राम में स्वयंसेवक” पर यह परिचर्चा स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक नायकों को सम्मान देने का माध्यम भी बनी।
