भाजपा की नई राज्य समिति में कई पुराने चेहरे बाहर, इन नए नेताओं को मिली जगह

कोलकाता, 07 जनवरी । विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल की नई राज्य समिति की घोषणा कर दी है। प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य के कार्यभार संभालने के करीब छह महीने बाद सामने आई इस सूची में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। नई समिति में जहां कई पुराने और प्रभावशाली चेहरों को बाहर कर दिया गया है, वहीं कई नए नेताओं को अहम जिम्मेदारी देकर संगठन में संतुलन साधने की कोशिश की गई है।

नई राज्य समिति कुल 30 सदस्यों की है। इसमें प्रदेश अध्यक्ष शमीक भट्टाचार्य के साथ 12 उपाध्यक्ष, पांच महा सचिव और 12 सचिव शामिल किए गए हैं। इस बार की समिति में साफ तौर पर संगठनात्मक पुनर्गठन और चुनावी रणनीति की झलक दिखती है।

उपाध्यक्ष पद पर कई बदलाव किए गए हैं। पहले महा सचिव की जिम्मेदारी संभाल चुके अग्निमित्रा पाल और जगन्नाथ चट्टोपाध्याय को प्रमोशन देकर उपाध्यक्ष बनाया गया है। विधायक दीपक बर्मन, जो अब तक महा सचिव थे, उन्हें भी उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा मनोज टिग्गा, तनुजा चक्रवर्ती और अमिताभ राय को नए चेहरे के तौर पर उपाध्यक्ष बनाया गया है। इसी पद पर तृणमूल कांग्रेस से आए तापस राय और पूर्व केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक को भी जगह दी गई है। इससे पहले उपाध्यक्ष पद पर रहे कुछ पुराने नाम इस बार की सूची से बाहर हो गए हैं, जिससे संगठन के भीतर पीढ़ीगत बदलाव का संकेत मिलता है।
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महासचिव भी बदले गए

महासचिव पद पर भी बड़ा फेरबदल हुआ है। पार्टी ने लॉकेट चटर्जी और ज्योतिर्मय सिंह महतो को दोबारा महा सचिव की जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं विष्णुपुर से सांसद सौमित्र खां और शशि अग्निहोत्री को पहली बार इस अहम पद पर लाया गया है। बापी गोस्वामी को भी महा सचिव बनाए रखा गया है। इसके चलते कुछ पुराने संगठनात्मक चेहरे, जो पहले इस स्तर पर सक्रिय थे, नई टीम से बाहर हो गए हैं।

राज्य समिति के 12 सचिवों की सूची में भी कई नए और पुराने चेहरों का मिश्रण दिखता है। शंकर घोष, दीपांजन गुहा, सोनाली मुर्मू, मनोज पांडे, अम्लान भादुड़ी, महादेव सरकार, शखारव सरकार, सिंटू सेनापति, सरबरी मुखोपाध्याय, मोहन शर्मा, विभा मजुमदार और संजय बर्मा को सचिव बनाया गया है। इस सूची में कुछ ऐसे नेता शामिल हैं जिन्हें पहले संगठन में सीमित भूमिका मिलती थी, लेकिन अब उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

मोर्चा स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। युवा मोर्चा की जिम्मेदारी इंद्रनील खान और महिला मोर्चा की जिम्मेदारी फाल्गुनी पात्र को बरकरार रखी गई है। वहीं अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष पद पर सांसद खगेन मुर्मू को नया चेहरा बनाया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी चार्ल्स नंदी के पास थी, जिन्हें इस बार हटा दिया गया है। किसान मोर्चा में भी बदलाव हुआ है। पहले इसके अध्यक्ष महादेव सरकार थे, लेकिन अब यह जिम्मेदारी राजीव भौमिक को सौंपी गई है।

कुल मिलाकर नई राज्य समिति से यह साफ है कि विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने संगठन में बड़े स्तर पर बदलाव करते हुए कुछ पुराने चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया है और कई नए नेताओं को आगे बढ़ाया है। पार्टी नेतृत्व का फोकस इस बार सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और चुनावी धार को मजबूत करने पर दिख रहा है।

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