Notice: Function _load_textdomain_just_in_time was called incorrectly. Translation loading for the wordpress-seo domain was triggered too early. This is usually an indicator for some code in the plugin or theme running too early. Translations should be loaded at the init action or later. Please see Debugging in WordPress for more information. (This message was added in version 6.7.0.) in /home/ahscw237zdpo/public_html/wp-includes/functions.php on line 6121
भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी: प्रो.संजय द्विवेदी - Kolkata Saransh News

भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी: प्रो.संजय द्विवेदी

विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर केन्द्रीय संचार ब्यूरो द्वारा संगोष्ठी का आयोजन

भोपाल। भारत विभाजन की विभीषिका भारतीय आजादी का एक ऐसा बदरंग पन्ना है, जिसकी पीड़ा को देशवासी कभी नहीं भूल पाएंगे । यह लम्हों की नहीं ,सदियों की खता थी, जिसकी पीड़ा और टीस दिलों में आज तक है जो बरबस याद आती रहती है। इस आशय के विचार दो दिवसीय आजादी के पर्व, विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में अतिथियों ने व्यक्त किये ।

कार्यक्रम के आरंभ में भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) के पूर्व महानिदेशक और माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के प्रोफेसर संजय द्विवेदी और जनसंपर्क विभाग के पूर्व संचालक श्री लाजपत आहूजा ने उक्त कार्यक्रम में मुख्य रूप से अपने उद्गार व्यक्त किये ।
श्री आहूजा ने कहा कि विभाजन की पीड़ा का दर्द क्योंकि मेरे परिवार ने सहा है अतः इस वेदना को में करीब से जानता हूं।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्रोफेसर संजय द्विवेदी ने कहा कि 1947 में बंटवारे के बाद भी हम रक्तपात रोक नहीं पाए। इसलिए भारत विभाजन की पीड़ा को समझना जरूरी है, ताकि ऐसी घटनाएं दुहराई न जाएं। हमें अपने इतिहास की पूरी समझ होना जरूरी है, इससे ही हम जान पाएंगे कि हम किन रास्तों से होते हुए वर्तमान स्थिति तक पहुंचे हैं और भविष्य में हमें कहां जाना है? प्रोफेसर द्विवेदी ने कहा कि स्वतंत्रता की लड़ाई के दौरान भी हमारे बीच कहीं न कहीं मतभेद मौजूद थे, जिन्हें अंग्रेजों ने इस्तेमाल किया। हमें अपनी कमियों की तरफ देखना पड़ेगा और अपनी जिम्मेदारियां निभानी होगी। उन्होंने कहा कि हम सतर्क होते तो बंटवारा नहीं होता। बंटवारे के बावजूद देश को सांप्रदायिक दंगों के रूप में रक्तपात देखना पड़ा। उन्होंने कहा कि भारत बोध और राष्ट्रीय भावनाओं से भरे युवा ही देश की एकता और अखंडता को सुरक्षित रख पाएंगे।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जनसंपर्क के पूर्व संचालक श्री लाजपत आहूजा ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की घोषणा करके इस त्रासदी के पीड़ितों को अपना दर्द दूसरों के साथ बाटने का मौका दिया है| बंटवारे के दौरान हुए घटनाक्रम से आने वाली पीढ़ियां सबक ले सकती हैं। श्री आहूजा ने कहा कि अपने ही देश के लोगों को बंटवारे के बाद शरणार्थी कहा गया|
उन्होंने विभाजन के दौरान हुए अत्याचारों, खासतौर से महिलाओं और युवतियों के साथ हुई हुई दुष्कर्म की घटनाओं का उल्लेख किया और कहां किसी त्रासदी के पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए पत्र सूचना कार्यालय एवं केंद्रीय सूचना ब्यूरो के अपर महानिदेशक श्री प्रशांत पाठराबे ने स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला और बताया कि इस अवसर पर केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा मध्य प्रदेश के कई जिलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं|

कार्यक्रम को शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर अजय अग्रवाल, पत्र सूचना कार्यालय के निदेशक श्री मनीष गौतम और केंद्रीय सूचना संचार ब्यूरो के उपनिदेशक श्री शारिक नूर ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक श्री पराग मांदले ने किया. इस मौके पर सहायक निदेशक सुश्री करिश्मा पंत, सहायक निदेशक श्री अजय उपाध्याय, सहायक निदेशक श्री समीर वर्मा सहित कई गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद थे |

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *