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G7 Summit 2025: भारत-कनाडा के संबंधों में जमी बर्फ पिछली, उच्चायुक्तों की शीघ्र बहाली पर सहमति बनी - Kolkata Saransh News

G7 Summit 2025: भारत-कनाडा के संबंधों में जमी बर्फ पिछली, उच्चायुक्तों की शीघ्र बहाली पर सहमति बनी

 

कनैनिस्किस, 18 जून (भाषा) विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत और कनाडा ने जल्द ही एक-दूसरे की राजधानियों में उच्चायुक्तों को बहाल करने पर सहमति जताई है और यह फैसला ‘बेहद महत्वपूर्ण रिश्ते’ में स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक ‘ठोस कदम’ है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने यहां कनैनिस्किस में जी 7 शिखर सम्मेलन के दौरान ‘सकारात्मक और रचनात्मक बैठक’ की। मिसरी ने एक वीडियो बयान में कहा, “बैठक में साझा मूल्यों, लोकतंत्र व कानून के शासन, दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और कई अन्य समानताओं पर आधारित भारत-कनाडा संबंधों के महत्व पर चर्चा हुई।”

उन्होंने कहा, ” दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने इस ‘बेहद महत्वपूर्ण रिश्ते’ में स्थिरता बहाल करने के लिए ‘ठोस कदम’ उठाने पर सहमति जताई और इस दिशा में पहली बात, जिस पर सहमति बनी, वह थी एक-दूसरे की राजधानियों में जल्द से जल्द उच्चायुक्तों को बहाल करना। इसके बाद अन्य कूटनीतिक कदम उठाए जाएंगे।”

विदेश सचिव ने कहा कि भारत और कनाडा के प्रधानमंत्रियों ने समय के साथ व्यापार, दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क और कनेक्टिविटी से संबंधित कई क्षेत्रों में वरिष्ठ व कार्यकारी स्तर के कार्य प्रणाली तंत्र और चर्चाओं को फिर से शुरू करने पर भी सहमति जताई, जिसका उद्देश्य संबंधों को और अधिक गति प्रदान करना है।

भारत ने पिछले वर्ष ओटावा से अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था। कनाडा ने उन्हें खालिस्तानी समर्थक अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ने का प्रयास किया था। भारत ने इतनी ही संख्या में कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित भी कर दिया था। दोनों नेताओं ने मंगलवार को हुई बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी, डिजिटल बुनियादी ढांचे, कृत्रिम मेधा, खाद्य सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और आपूर्ति शृंखलाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर संभावित सहयोग पर चर्चा की।

मिसरी ने कहा, “दोनों देशों के बीच वर्तमान में रुकी हुई व्यापार वार्ता के मद्देनजर दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को इसे जल्द से जल्द शुरू करने का निर्देश देने का भी फैसला किया।” साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों नेता संपर्क में रहने और जल्द से जल्द एक बार फिर मिलने पर सहमत हुए। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक, कार्नी और मोदी ने आपसी सम्मान, कानूनी शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांत के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर कनाडा-भारत संबंधों के महत्व की पुष्टि की।

बयान में बताया गया, “नेताओं ने दोनों देशों में नागरिकों और व्यवसायों को नियमित सेवाएं फिर से देने के उद्देश्य से नए उच्चायुक्तों को नामित करने पर सहमति व्यक्त की।” बयान के मुताबिक, दोनों नेताओं ने लोगों के बीच मजबूत व ऐतिहासिक संबंधों, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी और कनाडा व भारत के बीच आर्थिक विकास, आपूर्ति शृंखला व ऊर्जा परिवर्तन में साझेदारी सहित महत्वपूर्ण वाणिज्यिक संबंधों पर भी चर्चा की।

बयान में बताया गया कि कार्नी ने अंतरराष्ट्रीय अपराध व दमन, सुरक्षा व नियम-आधारित व्यवस्था सहित जी7 एजेंडे में अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। बयान के मुताबिक, नेताओं ने प्रौद्योगिकी, डिजिटल परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में संबंधों को और मजबूत बनाने के अवसरों पर भी चर्चा की।

जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति भारत के वैश्विक नेतृत्व का प्रतिबिंब: कार्नी

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि जी7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार व गतिशीलता और भारत की नेतृत्व वाली स्थिति का प्रतिबिंब है। कार्नी ने मंगलवार को कनाडा में जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी के साथ द्विपक्षीय चर्चा की।

जी7 नेताओं के शिखर सम्मेलन के समापन पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कार्नी ने कहा, “जी7 में प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति की जहां तक बात है, तो प्रधानमंत्री मोदी ने 2018 से हर जी7 में भाग लिया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के आकार, भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिशीलता, भारतीय प्रौद्योगिकी, जी20 और उससे आगे के कई स्थानों पर भारत की नेतृत्व वाली स्थिति का प्रतिबिंब है।”

कार्नी ने कहा, “इसलिए जी7 के अध्यक्ष के रूप में, उस संदर्भ में प्रधानमंत्री की मेजबानी करना पूरी तरह से स्वाभाविक, पूरी तरह से सुसंगत है। मुझे पूरी उम्मीद है कि भारत के प्रधानमंत्री, अगले साल जी7 में उपस्थित रहेंगे।” कार्नी ने मोदी के साथ अपनी द्विपक्षीय बैठक को “महत्वपूर्ण” बताया।

उन्होंने कहा कि दोनों नेता फिर से उच्चायुक्तों की नियुक्ति की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कनाडा ने भारत को खालिस्तान समर्थक अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ने का प्रयास किया था, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। तनाव के बीच पिछले साल भारत ने अपने उच्चायुक्त और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था।

भारत ने कनाडा के इतने ही राजनयिकों को निष्कासित भी कर दिया था। भारत ने जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व वाली पिछली सरकार पर कनाडा में खालिस्तानी समर्थक तत्वों को गतिविधियां संचालित करने की अनुमति देने का आरोप लगाया था। ट्रूडो के बाद कार्नी कनाडा के प्रधानमंत्री बने। ट्रूडो के जाने के बाद, भारत ने कहा था कि उसे कनाडा के साथ फिर से संबंध बेहतर होने की उम्मीद है।

जी-7 शिखर सम्मेलन में मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई किए जाने का आग्रह किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख की पुष्टि करते हुए जी-7 समूह के नेताओं से आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को तेज करने का आग्रह किया और इसे ”बढ़ावा एवं समर्थन” देने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

‘ग्रुप ऑफ सेवन’ (जी-7) दुनिया की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं – फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इटली और कनाडा तथा यूरोपीय संघ का एक अनौपचारिक समूह है। इसके सदस्य वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा करने के लिए हर साल जी-7 शिखर सम्मेलन में मिलते हैं। प्रधानमंत्री ने कनाडा में ‘जी7 संपर्क सत्र’ में मंगलवार को अपने संबोधन के दौरान इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ”वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए हमारी सोच और नीति स्पष्ट होनी चाहिए – अगर कोई देश आतंकवाद का समर्थन करता है तो उसे इसकी कीमत चुकानी होगी।” मोदी ने कहा, ”एक तरफ हम अपनी प्राथमिकता के आधार पर हर तरह के प्रतिबंध लगाने में जल्दबाजी करते हैं। दूसरी तरफ, जो देश खुले तौर पर आतंकवाद का समर्थन करते हैं, उन्हें पुरस्कृत किया जाता है।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को दोहराया और पहलगाम में हुए भयावह आतंकवादी हमले की निंदा करने के लिए नेताओं को धन्यवाद दिया। उन्होंने उनसे आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई को गति देने का आग्रह किया और आतंकवाद को बढ़ावा देने एवं उसका समर्थन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की आवश्यकता को रेखांकित किया।”

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचों को निशाना बनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं और प्राथमिकताओं पर ध्यान दिए जाने का भी आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि भारत ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को वैश्विक मंच पर पहुंचाना अपनी जिम्मेदारी समझता है। ‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर आर्थिक रूप से कम विकसित देशों के संदर्भ में किया जाता है। मोदी ने कहा, ”उपलब्धता, पहुंच, सामर्थ्य, स्वीकार्यता के मूलभूत सिद्धांतों पर आगे बढ़ते हुए भारत ने समावेशी विकास का मार्ग चुना है।”

जायसवाल ने बताया कि मोदी ने अपने संबोधन में एक स्थायी एवं हरित मार्ग के माध्यम से सभी के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला और इस उद्देश्य की दिशा में भारत की वैश्विक पहलों जैसे कि अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन के बारे में विस्तार से बताया।

मोदी ने कहा, ”एआई (कृत्रिम मेधा) अपने आप में एक ऐसी प्रौद्योगिकी है जिसके लिए बहुत ऊर्जा की आवश्यकता है। अगर प्रौद्योगिकी-संचालित समाज की ऊर्जा आवश्यकताओं को स्थायी रूप से पूरा करने का कोई तरीका है तो वह नवीनीकृत ऊर्जा के माध्यम से ही है।” उन्होंने कहा कि पिछली सदी में ऊर्जा के लिए प्रतिस्पर्धा थी लेकिन इस सदी में ”हमें प्रौद्योगिकी के लिए सहयोग करना होगा।”

मोदी ने प्रौद्योगिकी के उपयोग को लोकतांत्रिक बनाने में भारत के अनुभव और इसे लागू करने के लिए मानव-केंद्रित दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, ”उन्होंने (मोदी ने) एआई से जुड़ी चिंताओं से निपटने और इस क्षेत्र में नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक शासन के मुद्दों से निपटने का आह्वान किया।”

मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि ‘डीप-फेक’ बड़ी चिंता का विषय है इसलिए एआई की मदद से बनाई गई सामग्री पर स्पष्ट घोषणा अंकित होनी चाहिए कि यह कृत्रिम मेधा की मदद से बनाई गई है। तस्वीर या वीडियो में किसी व्यक्ति के चेहरे या शरीर को डिजिटल रूप से बदलने की प्रौद्योगिकी को ‘डीपफेक’ कहते हैं। ‘मशीन लर्निंग’ और एआई से बने ये वीडियो और तस्वीरें असली जैसी नजर आती हैं और कोई भी व्यक्ति इन्हें देखकर धोखा खा सकता है।

इससे पहले, प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने जी-7 देशों के नेताओं के साथ प्रमुख वैश्विक चुनौतियों पर ”सार्थक” विचार-विमर्श किया तथा ग्रह को बेहतर बनाने को लेकर आकांक्षाएं साझा कीं। मोदी ने सात देशों के समूह के नेताओं और कनैनिस्किस में जी7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित नेताओं के साथ एक तस्वीर ‘एक्स’ पर साझा की।

उन्होंने लिखा, ”वैश्विक प्रगति के लिए एक साथ! प्रमुख वैश्विक चुनौतियों और बेहतर ग्रह के लिए साझा आकांक्षाओं पर जी7 नेताओं के साथ सार्थक विचार विमर्श हुआ। ” जायसवाल ने एक अलग ‘पोस्ट’ में लिखा, ”वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने और साझा मूल्यों को बढ़ावा देने की सामूहिक प्रतिबद्धता।”

उन्होंने मोदी द्वारा साझा की गई तस्वीर को ‘पोस्ट’ करते हुए लिखा, ”प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी7 देशों के नेताओं और आमंत्रित भागीदारों के साथ।” इससे पहले मोदी का उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने कनाडा में स्वागत किया। वह ‘जी7 संपर्क सत्र’ के लिए यहां पहुंचे थे। यह पिछले एक दशक में उनकी पहली कनाडा यात्रा है।

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