पश्चिम बंगाल में BJP-TMC दोनों के लिए नाक का सवाल बना दूसरा चरण, जाने कैसे

लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल में केवल तीन सीटों पर मतदान कराया जा रहा है। हालांकि ये तीनों ही सीटें भाजपा और टीएमसी दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन सीटों की वजह से उत्तर बंगाल में भाजपा की स्थिति काफी मजबूत हो गई है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को केवल दार्जिलिंग सीट पर जीत हासिल हुई थी। भाजपा ने पूरे राज्य में सात सीटों पर ही जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2019 में भाजपा ने इन तीनों सीटों पर ही बाजी मार ली। वहं बंगाल में कुल 18 सीटों पर जीत दर्ज की। बता दें कि पश्चिम बंगाल में कभी भाजपा की सरकार नहीं रही है। वहीं 2019 में भाजपा को बंगाल में अब तक की सबसे ज्यादा सीटें मिली थीं।

दार्जिलिंग सीट पर 2004 से ही भाजपा का ही सांसद है। वहीं बाकी दो सीटों पर भाजपा ने पहली बार 2019 में ही जीत दर्ज की थी। ऐसे में भाजपा के सामने भी इन सीटों पर वर्चस्व बनाए रखने की चुनौती है। वहीं इस क्षेत्र में अपनी पॉपुलरिटी बनाने के लिए अच्छे वोटों की उम्मीद भी भाजपा को है।

रायगंज की सात विधानसभा सीटों में 6 पर टीएमसी का कब्जा है। ऐसे में टीएमसी के पास एक उम्मीद की किरण जरूर है। टीएमसी को लगता है कि इन सीटों पर उसका वोटबैंक फिर से मजबूत हो गया है। वहीं रायगंज में भाजपा के खिलाफ वोट बंट गए हैं। टीएमसी के साथ ही यहां पर कांग्रेस और लेफ्ट का गठबंधन भी चुनाव लड़ रहा है। 2019 की बात करें तो भाजपा को इस सीट पर 40 फीदी वोट मिले थे। सीपीआईएम और कांग्रेस ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था और उन्हें 20 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे।

बालुरघाट की बात करें तो यहां से भाजपा अध्यक्ष सुकांता मजूमदार ही मैदान में हैं। भाजपा ने 2019 में इस सीट पर 3 फीसदी के अंतर से जीत हासिल की थी। हालांकि इस बार भी यहां भाजपा का विरोधी खेमा बंटा हुआ है। टीएमसी और कांग्रेस दोनों का दावा है कि उत्तर बंगाल में उन्हें कम से कम दो सीटों पर जीत हासिल होगी। वहीं गठबंधन ना होने की वजह से दोनों को ही नुकसान उठाना पड़ सकता है।

परंपरागत रूप से कांग्रेस और लेफ्ट दोनों उत्तर बंगाल में मजबूत थे। वहीं टीएमसी दक्षिण के इलाकों में मजबूत मानी जाती है। उत्तर में ज्यादातर बांग्लादेश से शिफ्ट हुए हिंदू बंगाली हैं।

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