बांग्ला सिनेमा के बड़े अभिनेता सौमित्र चट्योपाध्याय की पुण्यतिथि पर उनके करीब रहे संजय सिन्हा से खास बातचीत
कोलकाता: ‘ बचपन से मैं सौमित्र चटर्जी का नाम सुनता रहा।मेरी मां सौमित्र चट्टोपाध्याय की बहुत बड़ी फैन थीं।पापा भी उन्हें पसंद करते थे।मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनके साथ मेरा एक खास रिश्ता हो जाएगा और उनके साथ कैमरे के सामने मैं अभिनय करूंगा। ‘ इतना बोलते बोलते मीडिया पर्सनैलिटी और अभिनेता संजय सिन्हा की आंखें नम हो आईं।उन्होंने आगे कहा कि ‘ एक बांग्ला फिल्म के प्रोजेक्ट को लेकर उनके साथ मेरी पहली मीटिंग उनके आवास पर हुई।इसके बाद अक्सर उनसे मेरी बातें होती रहीं।सौमित्र काकू बड़े अभिनेता के साथ साथ एक नेक दिल इंसान भी थे। मैं उस समय अभिनय के क्षेत्र में कदम रख रहा था।कई बार मैं नर्वस हो जाता था,लेकिन वह मुझे समझाते – चिंता मत करो संजय।तुम बेहतर कर पाओगे।उनकी ये बातें मुझे काफी हिम्मत देती थीं।मुझे याद है कोलकाता के बाली में एक फिल्म की शूटिंग चल रही थी।उनके साथ मुझे कुछ सीन्स करने थे।तब मैं बहुत नर्वस हो गया था।कई बार रिटेक होने पर उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया और मेरे कंधे पर हाथ रखते हुए कहा,संजय,तुम भूल जाओ कि मैं सौमित्र चट्टोपाध्याय के साथ शूटिंग कर रहा हूं।बस इतना याद रखो कि मैं इस फिल्म का एक कैरेक्टर हूं और तुम भी।इसके बाद पता नहीं कहां से मुझमें ताकत आ गई और बगैर किसी रिटेक के ही सीन ओके हो गया। ‘ संजय ने आगे बताया , ‘ कुछ दिनों के बाद अचानक उनकी तबियत खराब हो गई।उन्हें कोलकाता के एक निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया। मैं लगातार उनकी खबर लेता रहा।अचानक उनकी तबियत बहुत खराब हो गई और फिर उन्होंने हमेशा के हम सभी को अलविदा कह दिया।उनके साथ बिताए एक एक पल को मैं कभी भूल नहीं सकता।मेरे दिल से बस एक ही आवाज निकलती है – तुम जहां भी रहो,अच्छे से रहो सौमित्र काकू। ‘
