कोलकाता, 13 जुलाई । पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के परिणाम बुधवार रात तक स्पष्ट हो गए। राज्य की 80 फ़ीसदी ग्राम पंचायत की सीटों पर कब्जा करने के बाद पार्टी ने राज्य की सभी जिला परिषद की सीटों पर कब्जा जमा लिया है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के 70 से अधिक विधायक और 18 सांसदों के बावजूद एक भी जिला परिषद पर कब्जा नहीं होना पार्टी के लिए निराशाजनक है। इस बारे में हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा है कि चुनाव वाले दिन हिंसा और मारपीट की वजह से लोग वोट देने नहीं गए और अधिकतर वोट छापामारी कर लिए गए हैं। इसलिए यह परिणाम बहुत अधिक मायने नहीं रखता। बहरहाल तमाम हिंसा और अपराधिक घटनाओं के बावजूद भाजपा ने 212 ग्राम पंचायतों पर कब्जा जमाया है। अगर उसे निष्पक्ष वोटिंग का नतीजा माना जाए तो जिला परिषद की एक भी सीट पार्टी की झोली में नहीं आना निश्चित तौर पर 2024 से पहले बड़ा झटका माना जा रहा है। राज्य में 3317 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें से 2641 पर तृणमूल का कब्जा हुआ है। ऐसे ही 341 पंचायत समिति में से 313 पर तृणमूल का कब्जा हुआ है। जबकि राज्य की सभी 20 जिला परिषदों पर तृणमूल ने कब्जा जमाया है। बुधवार रात तक जब तस्वीर स्पष्ट हुई तो यह उम्मीद भी टूट गई कि उत्तर बंगाल के जिले जिनमें अलीपुरद्वार और कूचबिहार में भारतीय जनता पार्टी हमेशा से मजबूत रही है वहां भी कांटे की टक्कर होगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। 2018 के पंचायत चुनाव की तरह इस बार भी सभी जिला परिषदों पर तृणमूल ने बड़े अंतर से जीत हासिल की है। खास तौर पर नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के गढ़ पूर्व मेदिनीपुर में भी भारतीय जनता पार्टी की मजबूती की उम्मीद थी लेकिन शुभेंदु के घर के आसपास के कुछ मतदान केंद्रों को छोड़ दिया जाए तो पूरे जिले में तृणमूल का दबदबा रहा है। यह भाजपा के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा रहा है।
