भाजपा को घेरने का जरिया बना अनंत महाराज की उम्मीदवारी, पृथक कूचबिहार आंदोलन में रहे हैं विवादित

 

कोलकाता, 13 जुलाई । भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा की एक सीट के लिए राज्य के बहुचर्चित चेहरा रहे अनंत महाराज को उम्मीदवार बनाया है। उनका व्यक्तित्व वैसे तो उत्तर बंगाल में राजवंशी समुदाय के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है लेकिन वह हमेशा से ही पृथक कूचबिहार राज्य की मांग करते रहे हैं। हालांकि उन्होंने अलग राज्य की मांग की है, अलग देश को ले करके उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा। इसलिए बहुत ज्यादा विवाद नहीं है लेकिन तृणमूल कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया है। तृणमूल सांसद शांतनु सेन ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी की योजना बंगाल को कई हिस्सों में बांटने की है। कभी पृथक उत्तर बंगाल की मांग करते हैं तो कभी अनंत महाराज जैसे लोगों को टिकट दे रहे हैं जो पृथक कूचबिहार की मांग करते रहे हैं। इससे साफ है कि भाजपा बंगाल को तोड़ने के लिए जो हिंसक आंदोलन करने वाले लोग हैं उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं।
हालांकि भाजपा प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने कहा है कि पार्टी राज्य के सभी समुदायों को साथ लेकर विकास की राह पर चलने वाली है। इसलिए अनंत महाराज को टिकट दिया गया है। वह उत्तर बंगाल के उस राजबंशी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं जो तृणमूल कांग्रेस के शासन में उपेक्षित है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अनंत महाराज को राज्यसभा में भेजकर भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा दांव चला है। उत्तर बंगाल में 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था लेकिन उसके बाद 2021 के विधानसभा चुनाव में वहां से कई हिस्सों में तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा से बेहतर प्रदर्शन किया। उसके बाद पंचायत चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन राज्य के उत्तरी हिस्सों में बहुत अच्छा नहीं रहा है। ऐसे में राजवंशी समुदाय और पृथक कूचबिहार आंदोलन के मुख्य चेहरा रहे अनंत महाराज को राज्यसभा भेजने पर निश्चित तौर पर 2024 में इसका लाभ पार्टी को मिल सकता है।

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