कोलकाता, 25 जून। लोकतंत्र में केवल और आम लोगों को केंद्रीय गतिविधियां होनी चाहिए। यह कहना है राज्य के राज्यपाल डॉ सी वी आनंद बोस का। वे श्री बड़ाबाजार कुमारसभा पुस्तकालय द्वारा स्थानीय रथीन्द्र मंच में रविवार को आयोजित 37वें विवेकानंद सेवा सम्मान समारोह में बतौर अध्यक्ष बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि यह सदी भारत की सदी है, भारत किसी व्यक्ति विशेष का नहीं है। इसकी सार्वभौमिकता जन साधारण से जुड़ी है। संविधान की प्रस्तावना का प्रारंभ भी “हम भारत के लोग’ संबोधन के साथ हुआ है। विवेकानन्द के आदर्श भी हमें जन साधारण की सेवा की प्रेरणा देते हैं।
गवर्नर ने कहा कि सेवा में ही प्रगतिशील भारत का भविष्य निहित है। पूर्व और पश्चिम का अगर मिलन हो सकता है तो सिर्फ भारतीय चिंतन के सहारे ही हो सकता है।’
समारोह में उन्होंने उत्तर पूर्व भारत के कार्बी आंगलांग जिले की समर्पित सेवाभावी सामाजिक संस्था “लखीमन संघ’ को सम्मान स्वरूप एक लाख रुपये की राशि एवं मानपत्र प्रदान किया।
राज्यपाल ने कहा कि स्वामी विवेकानन्द को यद्यपि बहुत कम आयु प्राप्त हुई थी फिर भी उन्होंने भारतीय संस्कृति, धर्म एवं अध्यात्म का जो संदेश हमें प्रदान किया वह देश और समाज का सदैव पथ प्रदर्शित करता रहेगा।
उन्होंने अपनी कार्बी आंगलांग जिले की प्रशासनिक सेवाओं के दौरान प्राप्त अनुभवों को साझा करते हुए इस बात पर बल दिया कि पहाड़ी एवं जनजातीय क्षेत्रों को वृहतर समाज से समरस करने की दृष्टि से पुस्तकालय द्वारा दिया गया यह सम्मान महत्वपूर्ण है।
समारोह के मुख्य अतिथि स्वामी कीर्तिप्रदानन्द महाराज ने कहा कि यह भारत की विचारधारा ही है जो पूरी दुनिया को शांति और मानवता का पाठ पढ़ाती है।
प्रधान वक्ता अतुल रामचन्द्र जोग ने आज के प्रायोगिक भाषा में विवेकानंद के सपनों को सच करने का रास्ता बताते हुए कहा कि रोटी, कपड़ा और मकान तो हार्डवेयर है किन्तु हमें सोफ्टवेयर यानि नैतिकता, सच्चरित्रता, सेवा, सहायता एवं ईमानदारी आदि पर भी ध्यान देना चाहिए, तभी हम देश की सच्ची सेवा कर पायेंगे। लखीमन संघ द्वारा 120 मंदिरों एवं विद्यालय के माध्यम से अपनी संस्कृति के संरक्षण हेतु किये जा रहे प्रयासों की आपने सराहना की।
विशिष्ट अतिथि सज्जन कुमार तुलस्यान ने स्वामी विवेकानन्द के चिंतन और आदर्शों पर चलने पर बल दिया तथा कुमारसभा के प्रयासों की भूरि भूरि प्रशंसा की।
लखीमन संघ के विशिष्ट कार्यकर्ता बलराम फांगचो ने अपनी संस्था के सम्मान के प्रत्युत्तर ने कुमारसभा के प्रति आभार व्यक्त किया। अपनी संस्था का प्रार्थना का सस्वर पाठ करते हुए सबको कार्बी आंगलांग आने का निमंत्रण दिया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन किया विदुषी डॉ. तारा दूगड़ ने, स्वागत भाषण दिया कुमारसभा के अध्यक्ष महावीर बजाज ने तथा धन्यवाद ज्ञापन किया पूर्व अध्यक्ष डॉ प्रेमशंकर त्रिपाठी ने। प्रारंभ में लोकप्रिय गायक ओमप्रकाश मिश्र ने डॉ अरुण प्रकाश अवस्थी रचित “प्रज्ञा के अनुपम आलोक’ गीत को प्रस्तुत किया। श्री योगेशराज उपाध्याय के वैदिक मंत्रों के साथ सीमा रस्तोगी, शंकुन्तला बागड़ी, बंशीधर शर्मा, सज्जन कुमार तुलस्यान, स्वामी कीर्तिप्रदानन्द महाराज तथा महामहिम राज्यपाल द्वारा लखीमन संघ के बलराम फांगचो का सम्मान किया गया। भागीरथ चांडक, नन्दकुमार लढ़ा, सत्यप्रकाश राय, अजय चौबे एवं अरुण प्रकाश मल्लावत ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया।
समारोह में लक्ष्मीनारायण भाला, श्रीकृष्ण भीड़े, नन्दलाल सिंघानिया, उत्तम महतो, शंकरलाल अग्रवाल, किशन झंवर, आचार्य राकेश पाण्डेय, सागरमल गुप्ता, डॉ. विन्दे•ारी प्रसाद सिंह, मुकुन्द राठी, सीताराम तिवारी, चम्पालाल पारीक, राजेश अग्रवाल “लाला’, रजत चतुर्वेदी, संजय मंडल, पूर्णिमा चक्रवर्ती, रंजना त्रिपाठी, प्रदीप तुलस्यान, सुनील हर्ष, शशि अग्रवाल, भंवरलाल मूंधड़ा, बिणापाणी दास, राजेश दूगड़, राजेन्द्र संचेती, डॉ. कमल कुमार, नितिन आर्य, वेदप्रकाश गुप्ता, बृजेन्द्र पटेल, रविप्रताप सिंह, दयाशंकर मिश्र, महेश केड़िया, नवीनकुमार सिंह, श्रीराम सोनी, महेश मोदी, अनिल ओझा “नीरद’, रुद्रकान्त झा, आशाराम काकड़ा, वरुण ठाकुर, शशि मोदी, बिमल मल्लावत, दुर्गा व्यास, नन्दलाल रोशन, डॉ. ऋषिकेश राय, जीवन सिंह, शनि चौहान, बृजेश सिंह, रमाकान्त सिन्हा, घनश्याम चौरसिया, जयप्रकाश सेठिया, रामचन्द्र अग्रवाल, सर्वेश राय, किशन गोपाल सूंठवाल, अशोक झा एवं गायत्री बजाज प्रभृति कोलकाता एवं हावड़ा के सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
