कोलकाता । पश्चिम बंगाल में शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार पार्थ चटर्जी ने आखिरकार मंत्रिमंडल और तृणमूल कांग्रेस से हटाए जाने के बाद गंभीर आरोप लगाया है। शुक्रवार को ईडी हिरासत में उन्हें जोका ईएसआई अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया। उन्होंने दावा किया है कि उनके खिलाफ साजिश रची गई है। गत शुक्रवार को पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया गया था और छह दिनों तक उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। लेकिन एक दिन पहले जब उन्हें मंत्रिमंडल और तृणमूल कांग्रेस के सभी पदों के साथ प्राथमिक सदस्यता से भी हटा दिया गया है तब उनका इस तरह का बयान अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने उन्हें पार्टी से हटाने की घोषणा की है इसलिए पार्थ के बयान को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
दरअसल शुक्रवार को ईडी के अधिकारी उन्हें लेकर चिकित्सकीय जांच के लिए जोका ईएसआई अस्पताल पहुंचे। थोड़ी देर के लिए उनकी गाड़ी मां फ्लाईओवर पर रुकी। वहां मीडिया कर्मियों ने उन्हें मंत्रिमंडल और पार्टी से हटाए जाने के बारे में सवाल पूछा लेकिन वह चुपचाप बैठे रहे। हालांकि जोका ईएसआई अस्पताल जब पहुंचे तब वहां भी उनसे वही सवाल पूछा गया तो उन्होंने अपने चेहरे पर लगा हुआ मास्क नीचे किया और कहा, “मेरे खिलाफ षडयंत्र रचा गया है। मुझे फंसा दिया गया।”
इसके बाद वह व्हीलचेयर पर बैठकर अस्पताल के अंदर गए हैं जहां उनकी चिकित्सकीय जांच हुई है।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले ही बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मिथुन चक्रवर्ती ने दावा किया है कि पार्थ और अर्पिता के संयुक्त मालिकाने वाले मकानों से बरामद किए गए रुपये और गहने आदि की केवल देखरेख दोनों करते थे। दरअसल यह संपत्ति किसी और की है। उनका इशारा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की ओर था। पार्थ तृणमूल कांग्रेस के महासचिव थे जो पार्टी का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद है। ऐसे में उनके इस बयान के बाद सवाल खड़े होने लगे हैं कि आखिर उन्होंने किस पर खुद को फंसाने के आरोप लगाए हैं।
