ढाक की थाप पर मंत्री अग्निमित्रा पाल ने बिखेरा दुर्गोत्सव का रंग

महिशिला के शिमूलतल्ला पूजा मंडप के उद्घाटन समारोह में दिखा बंगाल की परंपरा से जुड़ाव, मंत्री ने कहा- दुर्गापूजा पर ढाक बजाना और उलूध्वनि करना है खास

आसनसोल। दुर्गोत्सव की उमंग, ढाक की गूंज और बंगाल की पारंपरिक संस्कृति के रंगों के बीच आसनसोल के महिशिला कॉलोनी स्थित शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप का उद्घाटन समारोह खास बन गया। पश्चिम बंगाल सरकार की नगर उन्नयन मंत्री अग्निमित्रा पाल ने समारोह में न केवल शिरकत की, बल्कि स्वयं ढाक बजाकर दुर्गोत्सव के उल्लास में भागीदारी भी की। ढाक बजाने वाले कलाकारों के बीच पहुंचकर उनकी थाप के साथ ताल मिलाती मंत्री का पारंपरिक अंदाज वहां मौजूद लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा।
दुर्गापूजा के दौरान ढाक की गूंज बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है। पूजा मंडपों में ढाक की थाप सुनाई देते ही उत्सव का वातावरण और जीवंत हो उठता है। ऐसे में मंत्री अग्निमित्रा पाल का स्वयं ढाक बजाना और कलाकारों के साथ उत्सव का आनंद लेना समारोह के पारंपरिक रंग को और गहरा कर गया। इस अवसर पर अग्निमित्रा पाल ने दुर्गापूजा से जुड़ी अपनी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पूजा के दौरान वह भी ढाक बजाती हैं और पारंपरिक रूप से उलूध्वनि कर उत्सव की खुशियां मनाती हैं। बंगाल में शुभ अवसरों पर महिलाओं द्वारा की जाने वाली उलूध्वनि मंगलकामना और उल्लास की प्रतीक मानी जाती है। दुर्गापूजा के दौरान ढाक की थाप, शंखनाद और उलूध्वनि का संगम उत्सव को विशिष्ट पहचान प्रदान करता है। बंगाल में दुर्गापूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि लोककला, संगीत, शिल्प और सामाजिक सहभागिता का महापर्व है। पूजा मंडपों में बजने वाला ढाक श्रद्धालुओं को उत्सव के वातावरण से जोड़ता है। ढाक बजाने वाले कलाकार अपनी विशिष्ट ताल और लय से मां दुर्गा के स्वागत को यादगार बनाते हैं। प्रतिमा के स्वागत से लेकर पूजा-अर्चना और आरती तक, ढाक की गूंज दुर्गोत्सव के उल्लास को और बढ़ा देती है। महिशिला के शिमूलतल्ला पूजा मंडप में मंत्री की सहभागिता ने भी इसी सांस्कृतिक जुड़ाव को सामने रखा। उनका यह अंदाज दर्शाता है कि दुर्गापूजा बंगाल की जनजीवन और परंपराओं में कितनी गहराई से रची-बसी है। इस पर्व के दौरान लोग धार्मिक आस्था के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को भी उत्साहपूर्वक सहेजते हैं। दुर्गापूजा के अवसर पर आसनसोल सहित पश्चिम बर्दवान जिले के विभिन्न इलाकों में पूजा समितियां आकर्षक पंडालों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से उत्सव को यादगार बनाने में जुटी हैं। पूजा मंडपों के उद्घाटन के साथ ही श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगती है और इलाकों में उत्सव की रौनक दिखाई देने लगती है। महिशिला कॉलोनी के शिमूलतल्ला दुर्गापूजा मंडप में आयोजित उद्घाटन समारोह भी इसी उत्सवी वातावरण का हिस्सा रहा। मंत्री अग्निमित्रा पाल द्वारा ढाक बजाने की घटना ने कार्यक्रम को एक अलग पहचान दी और बंगाल की पारंपरिक दुर्गापूजा की जीवंत झलक प्रस्तुत की। दुर्गोत्सव की यही विशेषता है कि इसमें धार्मिक आस्था के साथ लोकपरंपराओं, कला और सामूहिक उल्लास का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। ढाक की थाप और उलूध्वनि जैसी परंपराएं पीढ़ी-दर-पीढ़ी बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाती हैं। शिमूलतल्ला पूजा मंडप में मंत्री की भागीदारी ने इसी परंपरा के प्रति जुड़ाव को रेखांकित किया।

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