दुर्गा पूजा 2026 : मिट्टी के भांड़ में अन्नपूर्णा की परिकल्पना, हल्दिया में ‘उड़ान’ की अनूठी दुर्गापूजा

पूर्व मेदिनीपुर, 14 अक्टूबर । जिले के औद्योगिक शहर हल्दिया में इस वर्ष भी दुर्गापूजा के अवसर पर कई आकर्षक विषयों पर आधारित पूजा पंडाल बनाए गए हैं। इसी बीच चैतन्यपुर के ‘उड़ान’ संगठन ने अपनी अनूठी परिकल्पना से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन ने इस वर्ष ‘मिट्टी के भांड़ में अन्नपूर्णा’ विषय पर दुर्गापूजा का आयोजन किया है।

दुर्गापूजा के अवसर पर प्रतिमा और पूजा पंडालों में अलग-अलग कलात्मक विषय देखने को मिलते हैं। इसी परंपरा में ‘उड़ान’ ने मिट्टी के भांड़ को समृद्धि और अन्नपूर्णा का प्रतीक बनाकर एक अलग संदेश देने का प्रयास किया है। इस पूजा के साथ कई सामाजिक गतिविधियां भी जुड़ी हुई हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, संगठन वर्षभर असहाय और जरूरतमंद लोगों की सहायता करता है। खाद्य सामग्री से लेकर नए कपड़ों तक का वितरण कर जरूरतमंदों की मदद की जाती है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी संगठन पौधे वितरित करने और उनका रोपण करने सहित विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियों में सक्रिय रहता है। इन सामाजिक कार्यों के साथ इस वर्ष संगठन ने पहली बार दुर्गापूजा का आयोजन किया है।

पूजापंडाल का निर्माण 30 फुट ऊंचे, 25 फुट चौड़े और 25 फुट लंबे क्षेत्र में किया गया है। इसमें मिट्टी के भांड़ (कुल्हड़) के साथ बांस, फाइबर और रंगीन कपड़ों का सुंदर संयोजन किया गया है। पंडाल के अंदर दीवारों पर नायलॉन के जाल और शिफॉन के धागों से कलात्मक सजावट की गई है। देवी-देवताओं की आकृतियों से लेकर विभिन्न अलंकरणों तक में जाल और धागों का उपयोग किया गया है। इस कलात्मक परिकल्पना को स्थानीय कलाकार अमित दास ने साकार किया है। वहीं, प्रतिमा कलाकार स्वपन गायेन के हाथों मां दुर्गा की पारंपरिक प्रतिमा आकार ले रही है, जिसमें देवी अपने पुत्र-पुत्रियों के साथ विराजमान होंगी।

क्लब के अध्यक्ष प्रदीप सामंत, सचिव प्रीतम नायक, पूजा समिति के संयुक्त अध्यक्ष प्रदीप सामंत और विष्णुपद सामंत, संयुक्त सचिव सुरजीत मंडल और समीरन सिन्हा, कोषाध्यक्ष कार्तिक माइति और विमान साउट्या तथा लेखा परीक्षक तरुण माइति ने बताया कि इस वर्ष की पूजा में बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को विशेष महत्व दिया गया है।

संगठन के सचिव प्रीतम नायक ने कहा कि यहां भांड़ समृद्धि का प्रतीक है। अन्न से भरा हुआ और आशीर्वाद से परिपूर्ण यह भांड़ हमारी लोकसंस्कृति से जुड़ा हुआ है। बंगाल के लोकजीवन में प्रचलित इस परिचित वस्तु को मंगलकारी भावना के साथ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

पूजा के अवसर पर संगठन लगभग 150 असहाय लोगों, 50 अनाथ बच्चों और 30 बुजुर्गों को नए कपड़े वितरित करेगा। इस प्रकार पूजा के माध्यम से जरूरतमंद लोगों की सहायता करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए पंडाल में आने वाले दर्शकों को फलदार पौधे भी वितरित किए जाएंगे।

षष्ठी से दशमी तक प्रतिदिन शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस प्रकार ‘उड़ान’ की दुर्गापूजा में बंगाल की लोकसंस्कृति, पारंपरिक कला, सामाजिक सेवा और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है।

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