दुर्गा पूजा 2026 : ‘वंदे मातरम -मेरा भारत, भविष्य का भारत’ थीम के साथ वृंदावन गार्डन दुर्गा पूजा का उद्घाटन

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–दुर्गापूजा मंडप दे रहा राष्ट्रीय जागरण का संदेश, ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष पर भारत के गौरव और भविष्य की झलक
कोलकाता, 14 अक्टूबर । कोलकाता के वीआईपी बाजार स्थित वृंदावन गार्डन दुर्गापूजा समिति इस वर्ष अपनी पूजा के माध्यम से दर्शकों को एक अनूठी भारत यात्रा पर ले जाने के लिए तैयार है। वंदे मातरम के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में समिति ने ‘वंदे मातरम -मेरा भारत, भविष्य का भारत’ थीम का चयन किया है। प्रवेश द्वार से लेकर मां दुर्गा के दर्शन तक, पूरा मंडप भारत के गौरवशाली अतीत, स्वतंत्रता संग्राम और भविष्य के सपनों को जीवंत करेगा। इस पूजा मंडप के उद्घाटन बुधवार शाम को हुआ है।

कार्यक्रम में पूजा समिति के अध्यक्ष सोमा रानीश्री रॉय, स्वामी प्रह्लादानंद महाराज और महासचिव अधिवक्ता स्वस्तिका भुवनेश्वरी, एमएवी राजू सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

इस मंडप में दर्शकों को प्राचीन भारत की गुरुकुल शिक्षा प्रणाली, वैदिक ज्ञान और योग परंपरा की झलक देखने को मिल रही है। इसके बाद बंकिम चंद्र चटर्जी के आनंदमठ और वंदे मातरम की रचना के ऐतिहासिक क्षणों को दर्शाया गया है, जिसने लाखों भारतीयों के दिलों में आजादी की लौ जलाई थी।

मंडप का मुख्य आकर्षण वर्ष 2047 के बाद के उन्नत भारत की परिकल्पना और ‘भविष्य की भारत माता’ का एक अनूठा रूप है। इस मातृ रूप के हाथों में भविष्य के भारत के निर्माण की मूलभूत शक्तियों के प्रतीक के रूप में अन्न, वस्त्र, शिक्षा और दीक्षा होगी। पृष्ठभूमि में भारतीय सभ्यता का प्रतीक बरगद का पेड़ और एक शांत लेकिन शक्तिशाली शेर नजर आ रहा है। समिति का मुख्य संदेश यह है कि देश को बदलने के लिए पहले खुद को बदलना होगा।

पूजा समिति की ओर से तरुण बेरा ने बताया कि दर्शन के बाद श्रद्धालु मंडप में रखे गए संकल्प वृक्ष के पास जाकर पेड़ लगाने, स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने, बच्चों की शिक्षा में मदद करने और समाज में सद्भाव बनाए रखने जैसे राष्ट्र निर्माण के छोटे-छोटे संकल्प ले सकेंगे।

पूजा के साथ-साथ समिति ने कई महत्वपूर्ण सामाजिक और सांस्कृतिक पहलों की भी योजना बनाई है।

बेरा ने कहा कि हस्तशिल्प और देशी रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए स्वदेशी मेले का आयोजन किया गया है। इसके अतिरिक्त, एक हज़ार पूर्णिमा देख चुके वरिष्ठ नागरिकों को ‘सहस्र चंद्र दर्शन सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत के मूक नायक के रूप में अपनी निरंतर सेवाएं देने वाले बुजुर्ग सफाई कर्मचारियों और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को भी विशेष सम्मान दिया जाएगा।

महानवमी के दिन सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर समाज के सभी वर्गों की कन्याओं को शामिल करते हुए एक विशेष द्वादश कुमारी पूजा का आयोजन किया जाएगा।

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