
कोलकाता, 24 जून । पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को कहा कि तारातला में निर्माणाधीन गोदाम के ढहने की घटना के पीछे पूर्व सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत निर्माण योजना में संरचनात्मक खामी होने की आशंका है। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 21 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। कई श्रमिकों के अब भी दबे होने की आशंका है।
मुख्यमंत्री ने दुर्घटनास्थल का दौरा करने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पांच मंजिला इस्पात ढांचे वाली इमारत की निर्माण योजना 17 जनवरी को स्वीकृत की गई थी। नगर निगम के अभियंता की प्रारंभिक जांच में योजना में त्रुटि की बात सामने आई है। उन्होंने कहा कि इसी खामी के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है, हालांकि इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत सभी निर्माण योजनाओं पर 31 जुलाई तक रोक लगा दी गई है। इस अवधि में सभी योजनाओं की दोबारा समीक्षा की जाएगी और आवश्यक होने पर नई स्वीकृति दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गोदाम का निर्माण पिछले करीब डेढ़ वर्ष से चल रहा था। यह जमीन कोलकाता बंदरगाह न्यास से पट्टे पर लेकर एक प्रमुख चाय निर्माण कंपनी के लिए गोदाम के रूप में विकसित की जा रही थी। लोगों के अनुसार, बुधवार सुबह से ही लोहे का विशाल ढांचा असामान्य रूप से हिल रहा था। दोपहर के समय कुछ श्रमिक प्रभावित हिस्से की जांच के लिए नीचे पहुंचे, तभी छत और इस्पात का ढांचा अचानक ढह गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बचावकर्मियों ने समय पर अभियान शुरू कर दिया, नहीं तो मृतकों की संख्या अधिक हो सकती थी। उन्होंने बताया कि घायलों को ग्रीन कॉरिडोर बनाकर एसएसकेएम अस्पताल पहुंचाया गया है। मलबे के भीतर अब भी 12 से 15 लोगों के फंसे होने की आशंका है। सेना और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के जवान बचाव अभियान में समन्वय के साथ जुटे हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, हादसे के समय इमारत के भीतर 40 से 50 श्रमिक काम कर रहे थे। हालांकि, मलबे में फंसे लोगों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। बचाव दल लोहे की मुड़ी हुई छड़ों को गैस कटर से काटकर रास्ता बना रहे हैं। भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। मलबे में फंसे लोगों तक पानी और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए कई स्थानों पर छेद किए गए हैं।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि जमीन पट्टे पर देने वाले के रूप में वह केवल पट्टा समझौते के तहत आवश्यक अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करता है। निर्माण कार्य शुरू करने से पहले नगर निगम और अन्य नियामक एजेंसियों से सभी वैधानिक मंजूरी, अनुमति और प्रमाणपत्र लेना पट्टाधारी की जिम्मेदारी होती है।
राज्य सरकार ने नवान्न से स्थिति पर नजर रखने के लिए विशेष आपात नियंत्रण कक्ष खोला है। प्रभावित परिवारों और आम लोगों के लिए 1070, 8697981070, 033-22143526 और 033-22535185 हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं।
