एक बच्चे के आँसू और एक महंगी सीख: पूर्व रेलवे में 15 रुपये बचाने की कोशिश आपके परिवार की शांति और सम्मान पर पड़ सकती है भारी


कोलकाता, 22 जून, 2026 — भीड़भरे प्लेटफ़ॉर्म पर आठ वर्षीय अनुभव दे (परिवर्तित नाम) की आँखों में आँसू थे। सिसकते हुए उसने कहा, “मैंने पापा से कई बार कहा कि वे अपने और मेरे लिए टिकट खरीद लें, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी।” उसके पिता सुब्रत दे (परिवर्तित नाम) शर्म से सिर झुकाए उसके बगल में खड़े थे। मात्र 15 रुपये बचाने की कोशिश ने परिवार को महंगे परिणामों में डाल दिया — आर्थिक नुकसान के साथ-साथ मानसिक तनाव और सम्मान का आघात, जो बच्चे के चेहरे पर साफ झलक रहा था।
पूर्व रेलवे दर्शाता रहा है कि बिना टिकट यात्रा सिर्फ़ एक अपराध नहीं, बल्कि व्यक्ति की गरिमा और सम्मान पर असर डालने वाला कृत्य है। महाप्रबंधक श्री मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में पूर्व रेलवे ने यात्रियों में जागरूकता बढ़ाने के कई अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रम चलाये हैं। रेलवे कर्मचारी सीधे यात्रियों से संपर्क कर वैध टिकट लेने की अपील करते रहे हैं, फिर भी बिना टिकट यात्रा करने वालों की संख्या चिंता जनक बनी हुई है, जिसके कारण सघन टिकट जाँच अभियान आवश्यक हो गए हैं।
मई 2026 के आधिकारिक आंकड़े समस्या की गंभीरता बताते हैं। 1 मई 2026 से 31 मई 2026 तक के दौरान:
हावड़ा मंडल: 86,601 बिना टिकट यात्रा के मामले पकड़े गए.
सियालदह मंडल: 46,591 मामले दर्ज किए गए.
आसनसोल मंडल: 48,416 मामले दर्ज किए गए.
मालदा टाउन मंडल: 30,945 मामले पकड़े गए.
पूरे पूर्व रेलवे में कुल: 2,12,553 बिना टिकट यात्रा के मामले सामने आए.
विशेष रूप से सियालदह मंडल के सियालदह दक्षिण खंड में बिना टिकट यात्रा अधिक पायी गयी है। रेलवे ज़ोर देता है कि किराया अन्य परिवहन के मुकाबले अत्यंत सस्ता है: छोटी दूरी पर ऑटो-रिक्शा या टोटो का न्यूनतम किराया लगभग ₹10 है, जबकि पूर्व रेलवे का न्यूनतम किराया केवल ₹5 है। उदाहरण के लिए:

सियालदह से डायमंड हार्बर/कैनिंग का एकतरफा टिकट: ₹15.
मासिक सीजन टिकट (उक्त मार्ग): ₹270.
कुछ स्टेशनों (खड़दह, मध्यमग्राम, सुभाषग्राम) के लिए एकल यात्रा किराया: ₹5, मासिक सीजन टिकट: ₹100.
पूर्व रेलवे ने कहा कि यात्रियों को अपने आर्थिक हित और मौजूदा सुविधाओं के बावजूद बिना टिकट यात्रा क्यों चुननी पड़ती है। टिकट खरीदना नागरिक कर्तव्य होने के साथ-साथ आर्थिक सुरक्षा का साधन भी है। बिना टिकट पकड़े जाने पर यात्री को तत्काल न्यूनतम ₹500 का जुर्माना और नियमित किराये का भुगतान करना पड़ता है।

कानूनी प्रावधान और दंड

पूर्व रेलवे ‘रेलवे अधिनियम’ के प्रावधानों को सख्ती से लागू करता है। प्रमुख धाराएँ निम्न हैं:
धारा 137: यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी के इरादे से बिना वैध टिकट के यात्रा करता है या पहले उपयोग किए गए टिकट/पास का पुनः उपयोग करता है, तो उसे यात्रा की गई दूरी का सामान्य किराया तथा उसके बराबर अतिरिक्त शुल्क देना होगा (न्यूनतम ₹500). मांग पर भुगतान न होने पर सक्षम न्यायालय दोषी को छह माह तक का कारावास, ₹500 तक का जुर्माना या दोनों दंड दे सकता है.
धारा 138: उन मामलों पर लागू होती है जहां धोखाधड़ी का स्पष्ट इरादा सिद्ध नहीं होता; फिर भी अतिरिक्त शुल्क और किराया वसूला जाता है, जिसकी न्यूनतम राशि ₹500 या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित अन्य राशि हो सकती है.
पूर्व रेलवे यात्रियों से अपील करता है कि वे वैध टिकट खरीदें और नियमों का पालन करें, ताकि परिवारों को अनावश्यक आर्थिक व मानसिक संकट से बचाया जा सके और रेल सेवाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित रहे।

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