आसनसोल शिल्पांचल में ‘डीओ’ के नाम पर रंगदारी का खेल! कोयला कारोबार से जुड़ा सिंडिकेट प्रतिटन वसूली कर रहा भारी रकम

आसनसोल (सत्यनारायण सिंह)।आसनसोल शिल्पांचल क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार और कोयला व्यापारियों से रंगदारी वसूली कोई नई बात नहीं है। लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की विभिन्न कोलियरियों से कोयला उठाव के दौरान डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) के नाम पर भारी भरकम अवैध वसूली की जाती है। स्थानीय स्तर पर सक्रिय कथित सिंडिकेट के कारण कोयला कारोबार से जुड़े लोगों को आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

क्या होता है डीओ (डिलीवरी ऑर्डर)

ईसीएल में डीओ का अर्थ ‘डिलीवरी ऑर्डर’ होता है। यह ईसीएल प्रबंधन द्वारा कोयला खरीदारों या ग्राहकों को जारी किया गया एक आधिकारिक दस्तावेज होता है। इस दस्तावेज के माध्यम से संबंधित व्यक्ति या कंपनी को निर्धारित समय सीमा के भीतर खदान या डिपो से आवंटित कोयले को उठाने अथवा उसका परिवहन करने का अधिकार मिलता है।
जिस व्यक्ति या कंपनी के नाम पर यह डिलीवरी ऑर्डर जारी किया जाता है, उसे डीओ धारक कहा जाता है और वही कोयले के उठाव की जिम्मेदारी निभाता है।

प्रति टन तय है वसूली की रकम

सूत्रों के अनुसार शिल्पांचल क्षेत्र में डीओ धारकों के बीच एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है। आरोप है कि रेलवे रैक के माध्यम से कोयला लोडिंग पर लगभग 1000 रुपये प्रति टन और ट्रकों के जरिए कोयला लोडिंग पर लगभग 1650 रुपये प्रति टन की अवैध वसूली की जाती है।
बताया जाता है कि इस अवैध कारोबार को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के लिए नीचे से लेकर ऊपर तक कथित तौर पर ‘चढ़ावे’ के रूप में लिफाफे पहुंचाए जाते हैं।

लोकेश, पप्पू और शशि पर सिंडिकेट चलाने का आरोप

स्थानीय सूत्रों का दावा है कि वर्तमान में इस कथित डीओ सिंडिकेट का संचालन दुर्गापुर के लोकेश और रानीगंज के पप्पू नामक व्यक्तियों के नेतृत्व में किया जा रहा है। इनके संरक्षण में पूरे शिल्पांचल इलाके में डीओ के नाम पर रंगदारी वसूली की जा रही है। इसके अलावा डीबूडीह तथा रूपनारायणपुर—झारखंड-बंगाल सीमा क्षेत्र में शशि नामक व्यक्ति द्वारा कोयला लदे ट्रकों और अन्य वाहनों से अवैध वसूली किए जाने की भी चर्चा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां बिना प्रशासनिक और अन्य स्तरों पर सहयोग के संभव नहीं हो सकतीं।

कई इलाकों में अब भी जारी है कोयला चोरी

बताया जाता है कि लगभग एक वर्ष पहले तक कई कोयला डिपो से रंगदारी के साथ-साथ सीधे कोयला चोरी की घटनाएं भी सामने आती थीं। हालांकि पिछले एक वर्ष में कुछ क्षेत्रों को छोड़कर इस पर काफी हद तक रोक लगी है। फिर भी कुल्टी, पांडवेश्वर, रानीगंज और जामुड़िया क्षेत्र के कुछ इलाकों में अभी भी कोयला चोरी की गतिविधियां जारी रहने की बात कही जा रही है।

ईडी की कार्रवाई के बाद बदला ठिकाना

कोयला तस्करी और अवैध वसूली के मामलों में पहले भी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा कई बड़ी कार्रवाइयां की जा चुकी हैं। इन कार्रवाइयों में कई कोयला कारोबारियों और कथित माफियाओं को जेल भी जाना पड़ा है। हाल ही में भी ईडी ने शिल्पांचल क्षेत्र के कई कोयला कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर भारी मात्रा में नकदी बरामद की थी।
इन कार्रवाइयों के बाद कई कथित कोयला माफिया और रंगदारी वसूलने वाले लोगों ने अपना ठिकाना बदल लिया है, लेकिन आरोप है कि अवैध कारोबार अब भी जारी है।

डीओ वसूली पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं

आरोपों के बावजूद डीओ सिंडिकेट के कथित मास्टरमाइंड बताए जा रहे पप्पू और लोकेश के खिलाफ अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जाता है कि डीओ के नाम पर प्रतिदिन शिल्पांचल क्षेत्र से करोड़ों रुपये की अवैध वसूली होती है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कथित तौर पर विभिन्न स्तरों तक पैसे पहुंचने के कारण इस पूरे मामले पर अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

क्या कहते हैं अधिकारी

इस पूरे मामले पर ईसीएल के अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं। कुछ अधिकारियों का कहना है कि उनका मुख्य कार्य कोयला बेचना है। कोयला उठाव के दौरान अगर कहीं अवैध वसूली या रंगदारी की शिकायत होती है, तो उसकी जांच करना प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी है। फिलहाल आसनसोल शिल्पांचल में डीओ के नाम पर हो रही कथित रंगदारी और अवैध वसूली का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है और स्थानीय लोगों के बीच इस पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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