
कोलकाता/आसनसोल: पश्चिम बंगाल के कानूनी हलकों में इन दिनों राज्य बार काउंसिल चुनावों की सरगर्मी अपने चरम पर है। प्रदेश भर के अधिवक्ता अपने भविष्य और कल्याण के लिए एक योग्य, अनुभवी और समर्पित प्रतिनिधि चुनने की तैयारी कर रहे हैं। इस चुनावी समर में वैसे तो कई दिग्गज मैदान में हैं, लेकिन जिस एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा और सराहना हो रही है, वह है— श्री सौरीन दास। पश्चिम बंगाल बार काउंसिल चुनाव में श्री सौरीन दास सीरियल नंबर 66 पर अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहे हैं।
श्री सौरीन दास कानूनी पेशे में मात्र एक नाम नहीं हैं, बल्कि उनका एक विशाल और प्रतिष्ठित करियर रहा है। वे वर्तमान में नोटरी पब्लिक (Notary Public) होने के साथ-साथ पैनल पब्लिक प्रोसिक्यूटर इन चार्ज (Panel Public Prosecutor in charge) जैसे महत्वपूर्ण और गरिमामयी पदों पर भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। उनका यह प्रशासनिक और कानूनी अनुभव उन्हें बार काउंसिल के एक सशक्त उम्मीदवार के रूप में स्थापित करता है।
इतने ऊंचे पदों पर आसीन होने के बावजूद, श्री दास की जड़ें हमेशा जमीन से और आम वकीलों की समस्याओं से जुड़ी रही हैं। वे उन अनगिनत संघर्षरत और युवा वकीलों के लिए एक उम्मीद की किरण हैं, जो दूरदराज के इलाकों से आकर वकालत के पेशे में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में, उनके इन्हीं निस्वार्थ कार्यों को देखते हुए उन्हें एक विशेष सम्मान से नवाजा गया। कलकत्ता उच्च न्यायालय के जाने-माने अधिवक्ता और ‘नेशनल यूथ एडवोकेट्स एसोसिएशन’ (National Youth Advocates Association) के वर्तमान अध्यक्ष, श्री स्वप्निल मुखर्जी ने श्री सौरीन दास को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया।
श्री स्वप्निल मुखर्जी ने सम्मान समारोह में स्पष्ट किया कि श्री सौरीन दास को यह पुरस्कार विशेष रूप से ग्रामीण और उप-नगरीय क्षेत्रों के अधिवक्ताओं को दिए गए उनके अभूतपूर्व और निस्वार्थ समर्थन के लिए प्रदान किया गया है। महानगरों से दूर के इलाकों में संसाधनों की भारी कमी होती है। ऐसे में दुर्गापुर, अंडाल, पानागढ़, रानीगंज, आसनसोल, नियामतपुर, खातड़ा, बांकुड़ा, पुरुलिया, रघुनाथपुर और बीरभूम जैसे क्षेत्रों के अधिवक्ताओं के लिए श्री दास एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरे हैं।
उन्होंने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अधिवक्ता, चाहे वह कितनी भी दूर क्यों न रहता हो, बार काउंसिल की कल्याणकारी योजनाओं से वंचित न रहे। सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि श्री सौरीन दास ने अपने निजी खर्च से ‘एडवोकेट्स वेलफेयर फॉर्म’ (Advocates Welfare Form) खरीदे और उन्हें इन ग्रामीण और उप-नगरीय क्षेत्रों के वकीलों के बीच बिल्कुल मुफ्त वितरित किया।
इसके अलावा, श्री सौरीन दास युवा और नव-नामांकित (Newly Enrolled) अधिवक्ताओं के अधिकारों और सुविधाओं के लिए लगातार जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। कानूनी पेशे में कदम रखने वाले नए वकीलों को अक्सर आर्थिक तंगी और प्रशासनिक जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। चाहे नए वकीलों के स्टाइपेंड (Stipend) का मुद्दा हो, बार काउंसिल में एनरोलमेंट (Enrollment) की प्रक्रिया को सुलभ बनाना हो, या फिर नए वकीलों के लिए समय पर पहचान पत्र (ID Card) बनवाना हो—श्री दास ने हर कदम पर युवा वकीलों का मार्गदर्शन किया है।
एक ‘नोटरी पब्लिक’ और ‘पैनल पीपी इन चार्ज’ के रूप में उनका अनुभव यह सुनिश्चित करता है कि वे सिस्टम की कार्यप्रणाली को बेहतरीन तरीके से समझते हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि बार काउंसिल को ऐसे ही अनुभवी और जमीनी नेताओं की आवश्यकता है जो वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर जिला स्तर के वकीलों की वास्तविक समस्याओं का समाधान निकालें।
जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, सीरियल नंबर 66 पर अपनी दावेदारी पेश कर रहे श्री सौरीन दास का पलड़ा काफी भारी नजर आ रहा है। युवा वकीलों से लेकर वरिष्ठ अधिवक्ताओं तक, हर कोई उनके अनुभव और निस्वार्थ सेवा भाव की सराहना कर रहा है।
