बंगाल एसआईआर : सुनवाई प्रगति से  निर्वाचन आयोग संतुष्ट, दस्तावेज अपलोडिंग की धीमी गति पर चिंतित

 

कोलकाता, 30 जनवरी । पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के वर्तमान चरण को लेकर भारत निर्वाचन आयोग ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। आयोग ने दावों और आपत्तियों पर चल रही सुनवाई की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया है, लेकिन सुनवाई के दौरान मतदाताओं द्वारा जमा किए गए सहायक पहचान दस्तावेज़ों की धीमी अपलोडिंग को लेकर गंभीर चिंता भी जताई है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ), पश्चिम बंगाल कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, कुल एक करोड़ 62 लाख मतदाताओं जिसमें “अनमैप्ड मतदाता” और “तार्किक विसंगति” से जुड़े मामले शामिल हैं, को सुनवाई के लिए बुलाया गया था। इनमें से लगभग एक करोड़ 42 लाख मतदाताओं की सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक केवल 59 लाख मतदाताओं के दस्तावेज़ ही अपलोड किए जा सके हैं।

दस्तावेज़ों की यह धीमी अपलोडिंग इस आशंका को जन्म दे रही है कि क्या 14 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तय समयसीमा पूरी हो पाएगी या फिर इसे आगे बढ़ाना पड़ेगा।

सीईओ कार्यालय के अधिकारियों के मुताबिक, दस्तावेज़ अपलोडिंग में देरी का प्रमुख कारण चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का बार-बार उल्लंघन है। आरोप है कि राज्य के कुछ निर्वाचन अधिकारी विशेषकर निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) और बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) निर्धारित सूची के बजाय अनुमोदन रहित पहचान दस्तावेज़ स्वीकार कर रहे हैं, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

इसी पृष्ठभूमि में निर्वाचन आयोग की पूर्ण पीठ शुक्रवार को सीईओ कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों और आयोग द्वारा नियुक्त विशेष रोल पर्यवेक्षकों के साथ एक लंबी वर्चुअल बैठक कर रही है। यह बैठक सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और इसके कई घंटों तक चलने की संभावना है। बैठक में उन कमियों की पहचान की जा रही है, जिनके कारण पुनरीक्षण प्रक्रिया में देरी हो सकती है।

सूत्रों के अनुसार, बैठक के दौरान निर्वाचन आयोग द्वारा अनसूचित दस्तावेज़ों को स्वीकार करने पर सख्त अल्टीमेटम जारी किया जा सकता है। आयोग पहले ही चेतावनी दे चुका है कि यदि कोई ईआरओ, एईआरओ या बीएलओ जानबूझकर दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते पाए गए, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विशेष रोल पर्यवेक्षकों ने ऐसे कई मामलों की पहचान की है और कथित रूप से जिम्मेदार अधिकारियों के नाम भी चिन्हित किए हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *