कोलकाता, 13 जुलाई । वैसे तो पूरे देश में ऐसा मनोभाव रहता है कि जहां भ्रष्टाचार हो या जो भी नेता भ्रष्टाचार में संलिप्त हों उनकी पार्टियों को जनता नकारती है। लेकिन पश्चिम बंगाल में इसके ठीक विपरीत हुआ है। राज्य के बहुचर्चित करोड़ों के शिक्षक नियुक्ति भ्रष्टाचार के मामले में सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के तीन विधायक, पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी, प्राथमिक शिक्षा परिषद के पूर्व अध्यक्ष और विधायक माणिक भट्टाचार्य तथा जीवन कृष्ण साहा जेल में हैं। इसके अलावा तृणमूल के दो बड़े नेता शांतनु बनर्जी और कुंतल घोष भी प्रेसीडेंसी जेल की सलाखों के पीछे हैं। लेकिन इनके गढ़ यानी घर के आसपास के क्षेत्र जहां इनका प्रभाव है वहां तृणमूल कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं हुआ है। बल्कि बेहतर प्रदर्शन हुआ है। इनमें से पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी तो कोलकाता के बेहला के रहने वाले हैं और यहीं से विधायक भी हैं। इस क्षेत्र में पंचायत चुनाव नहीं हुआ है। बाकी माणिक भट्टाचार्य जो प्लासीपाड़ा से विधायक भी हैं वहां 90 फ़ीसदी ग्राम पंचायतों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा हुआ है। जबकि सभी पंचायत समितियों और जिला परिषद पर तृणमूल ने जीत हासिल की है। 2018 में भी इतना बढ़िया प्रदर्शन तृणमूल का नहीं था। इसी तरह से जीवन कृष्ण साहा मुर्शिदाबाद के बड़वान से तृणमूल कांग्रेस के विधायक हैं। इनके क्षेत्र में ग्राम पंचायत की सातों सीटों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा हुआ है। यहां 234 ग्राम सदस्य सीटें हैं जिनमें से 110 तृणमूल की झोली में गई हैं। जिला परिषद की सभी तीन सीटों पर तृणमूल का कब्जा हुआ है। इसी तरह से बालागढ़ से तृणमूल नेता शांतनु और कुंतल दोनों के ही प्रभाव वाले क्षेत्र में तृणमूल का परचम लहराया है। यह हुगली जिले में पड़ता है और यहां की 13 ग्राम पंचायतों पर तृणमूल कांग्रेस का कब्जा हुआ है। पंचायत समिति की 39 में से 37 सीटों पर तृणमूल का कब्जा हुआ है जबकि सभी जिला परिषद तो पार्टी पहले से ही जीतकर परचम लहरा चुकी है। कुल मिलाकर देखा जाए तो नियुक्ति भ्रष्टाचार भी लोगों के लिए बहुत अधिक गंभीर मामला नहीं रहा है।
