कोलकाता, 18 अप्रैल । विश्व भारती विश्वविद्यालय की ओर से घर पर लगाए गए नोटिस के जवाब में अमर्त्य सेन ने पत्र लिखा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने उन्हें घर खाली करने को कहा है। इसके जवाब में एक दिन पहले सोमवार को लिखे अपने पत्र में अमर्त्य सेन ने कहा है कि 1943 से मेरे पिता आशुतोष सेन और अमिता सेन इसी घर में रहते थे और उनके निधन के बाद संपत्ति मुझे ट्रांसफर की गई है। बीरभूम के जिला अधिकारी के संज्ञान में पूरा मामला है और आसपास अतिरिक्त जमीनें भी खरीदी गई हैं। पिछले 80 से अधिक सालों से जिस जमीन पर मेरा पुश्तैनी घर है उस पर किसी भी तरह के नोटिस को स्वीकार नहीं किया जाएगा। पत्र में उन्होंने लिखा है कि कानून के मुताबिक यहां शांति व्यवस्था बहाल रहनी चाहिए। वह जून महीने में लौटेंगे।
उल्लेखनीय है कि विश्व भारती विश्वविद्यालय की ओर से आशुतोष सेन को कुछ जमीन किराए पर दी गई थी। विश्वविद्यालय प्रबंधन का दावा है कि नियमानुसार वह जमीन उनके जिंदा रहने तक उनके रहने के लिए थी। उनके निधन के बाद जमीन विश्वविद्यालय को वापस की जानी थी लेकिन राज्य सरकार ने उसे अमर्त्य सेन के नाम पर पंजीकृत कर दिया है। इसे लेकर विश्वभारती विश्वविद्यालय की ओर से लगातार आपत्ति जताई जा रही है। कुलपति विद्युत चक्रवर्ती की ओर से कई बार इस संबंध में अमर्त्य सेन को नोटिस दिया जा चुका है।

